दतिया | पंडोखर धाम में आयोजित 30वें महोत्सव और श्रीराम महायज्ञ ने इस बार न सिर्फ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा दी है, बल्कि सैकड़ों छोटे-बड़े दुकानदारों के जीवन में आर्थिक खुशहाली भी लेकर आया है। मेले की रौनक के बीच व्यापारियों के चेहरे पर जो संतोष और उत्साह दिखाई दे रहा है, वह इस आयोजन के आर्थिक महत्व को भी स्पष्ट करता है। लगातार बढ़ती भीड़ और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने बाजार को नई गति दी है, जिससे व्यापारियों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है।

हर दुकान पर रौनक, हर चेहरे पर मुस्कान : मेले में सजी दुकानों की विविधता और आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। महिलाओं के श्रृंगार सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, बच्चों के खिलौने, झूले, फास्ट फूड स्टॉल और गन्ने के रस तक—हर दुकान पर ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले, मौत का कुआं और अन्य मनोरंजन के साधन मेले को और जीवंत बना रहे हैं। इस चहल-पहल ने दुकानदारों के व्यापार को नई ऊंचाई दी है।
“मेला बना कमाई का सबसे बड़ा सहारा” : डबरा से आए दुकानदार प्रमोद सेन बताते हैं कि वे पिछले 4-5 वर्षों से लगातार इस मेले में आ रहे हैं और हर बार उन्हें उम्मीद से बेहतर कमाई होती है। उनका कहना है कि यहां भोजन, बिजली, पानी और दुकान लगाने के लिए स्थान जैसी सुविधाएं निशुल्क मिलती हैं, जिससे उनका खर्च बेहद कम हो जाता है और मुनाफा बढ़ जाता है। उनके अनुसार, पंडोखर मेला छोटे व्यापारियों के लिए किसी अवसर से कम नहीं है।
“पिछले अनुभव से बढ़ी उम्मीदें” : जालौन जिले से आए बीरू भाई ने बताया कि पिछली बार उनकी फास्ट फूड की दुकान ने उन्हें शानदार मुनाफा दिया था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। इसी सकारात्मक अनुभव के कारण वे इस वर्ष भी पूरे उत्साह के साथ दुकान लेकर आए हैं। उनका मानना है कि यह मेला छोटे व्यापारियों के लिए स्थायी आय का मजबूत जरिया बनता जा रहा है।

स्थानीय व्यापारियों को मिला नया मंच : पंडोखर के ही निवासी रोहित गुप्ता, जो पहली बार दुकान लगा रहे हैं, बताते हैं कि यह मेला उनके लिए घर खर्च चलाने का बेहतरीन अवसर है। चाय-नाश्ते, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और मिट्टी के बर्तनों की बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय लोगों को भी आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलता है।
“कमाई के साथ सेवा का भाव भी” : इंदरगढ़ से आए धर्मेंद्र शाक्यवार ने बताया कि वे पहली बार गन्ने के जूस की दुकान लेकर पहुंचे हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि यहां से अच्छी कमाई होगी। उन्होंने कहा कि इस कमाई का एक हिस्सा वे धाम में दान भी करेंगे, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ के साथ आध्यात्मिक संतोष भी मिलेगा।
सुविधाओं ने बढ़ाया आत्मविश्वास : कोच (जालौन) से आए अनुभवी दुकानदार तहसीम खान बताते हैं कि वे कई वर्षों से इस मेले का हिस्सा बन रहे हैं। उनके अनुसार, यहां किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता और सुरक्षा, बिजली, पानी जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यही कारण है कि दुकानदार बिना किसी डर या परेशानी के अपना व्यापार कर पाते हैं और बेहतर कमाई कर पाते हैं।
आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा : पंडोखर महोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। बढ़ती भीड़ और श्रद्धालुओं की संख्या ने छोटे व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। यह आयोजन न केवल आस्था को सशक्त कर रहा है, बल्कि व्यापारियों के जीवन में स्थिरता, आत्मनिर्भरता और समृद्धि भी ला रहा है।

