कोरोना पर भारी पड़ी आस्था, भगवान भास्कर के आंगन में भक्तों ने जमकर खेली होली

दतिया। कोरोना गाइड लाइन पर आस्था उस समय भारी दिखी जब उनाव िस्थत भगवान भास्कर के बालाजी धाम में रंगपंचमी का पर्व 3 से 4 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पारंपरिक तरीके से उत्साहपूर्वक मनाया गया। जबकि प्रशासन ने बालाजी धाम में रंगपंचमी मेला स्थगित रखा था। इस दौरान मंदिर में सिर्फ 20 लोगों के ही जाने की पाबंदी भी लगाई गई थी। शुक्रवार सुबह से ही व्यवस्थाओं को संभालने के लिए आसपास के पांच थानों का पुलिस बल भी मुस्तैद था। बावजूद इसके जैसे ही भगवान भास्कर से होली खेलने की परंपरा पूरी हुई, उसके बाद तो भक्तों का सैलाब सा मंदिर प्रांगण में उमड़ पड़ा। भगवान भास्कर के आंगन में भक्तों ने जमकर अबीर, गुलाल उड़ाया और रंगपंचमी की परंपरा निभाई। इस मौके पर फगुआरों ने भगवान भास्कर के दरबार में फागों की प्रस्तुति दी।

उनाव में मंदिर प्रांगण में होली खेलते श्रद्धालुजन

कोरोना नहीं दिखा खौफ

मंदिर प्रांगण में होली खेलते श्रद्धालुजन

इस अवसर पर दूरराज से पहुंचे श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भास्कर के रंगों से हुए विशेष अभिषेक उपरांत मंदिर परिसर और इसके आसपास जमकर रंग खेला गया। हालांकि इन दिनों कोरोना पुनः अपने पांव पसार रहा है और जिसके चलते प्रशासन ने सभी प्रकार के मेलों आदि पर रोक लगा दी है। लेकिन भगवान भास्कर के भक्तों को कोरोना का किसी प्रकार से कोई भय नजर नहीं आया और लोग बेखौफ होकर एक-दूसरे पर रंग अबीर उड़ाते नजर आए।

बालाजी दरबार में फूलों से बने रंग से खेली गई होली

परंपरा अनुसार भगवान भास्कर के लिए फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किया जाता है। इसके लिए मंदिर प्रबंधन कमेटी ने गुरुवार शाम रीति अनुसार नए मिट्टी के मटके में टेसू, गुलाब, गेंदा आदि को मिश्रित कर पहुंज नदी के जल के साथ रात भर के लिए गलने रख दिया था। रंगपंचमी पर अभिषेक के लिए शुक्रवार को मध्यांह्न 12 बजे इस रंग का उपयोग किया गया। इसके अलावा सूर्य की किरणों की प्रतीक स्वरूप सात रंगों के बतौर प्रतिनिधित्व सात अलग-अलग रंगों के अबीर भी लिए गए। दोपहर एक बजे मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से फूलों से तैयार रंग एवं अबीर से भगवान भास्कर के अभिषेक उपरांत इन रंगों को भगवान भास्कर संग होली खेलने पहुंचे श्रद्धालुओं पर उड़ाया गया। अभिषेक दौरान कोविड 19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए मुख्य मंदिर परिसर में मंदिर प्रबंधन सदस्यों के अलावा अन्य श्रद्धालुओं के प्रवेश को वर्जित रखा गया। मंदिर के सभी प्रवेश द्वार बंद रखे गए। अभिषेक उपरांत जैसे प्रवेश द्वार खोले गए तो फिर कोविड के नियमों कहीं नजर नहीं आएं। इस दौरान पुलिस भी श्रद्धालुओं को रोक पाने में सफल नहीं हो सकी।

भगवान भास्कर का अभिषेक करते पुजारी

फागुआरों ने बांधा समां

मंदिर के आंगन में फाग गाते फगुआरे

इस अवसर पर मंदिर परिसर में विभिन्न टोलियों में फाग गायन किया। मंदिर परिसर और बाहर जहां रंग-अबीर उड़ रहा था वहीं ढोलक, मंजीरे, हारमोनियम की धुन पर फाग गायकों में अपने गायन से दूसरी टोलियों को मात देने की जैसे होड़ लगा रखी थी। इस दौरान लोगों ने पहुंज नदी में भी स्नान किए और फिर स्नान उपरांत भगवान भास्कर का पहुंज नदी के जल से अभिषेक कर गुलाल अर्पित कर अगले वर्ष फिर होली मनाने की कामना के साथ अपने घरों को वापिसी की। इस अवसर पर लगभग 3 से 4 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

Share

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter