दतिया कृषि उपज मंडी में किसानों ने मचाया हंगामा, तौलकांटे में गड़बड़ी को लेकर थे नाराज, पुलिस मौके पर पहुंची

Datia News : दतिया। कृषि उपज मंडी में तौल कांटे पर उपज की तुलाई में निकली गड़बड़ी पर एक बार फिर किसान भड़क गए। किसानों ने तौल में गड़बड़ी को लेकर मंडी प्रशासन को भी घेरा। उनका आरोप था कि पहले भी किसानों की उपज में घटतौली की शिकायतें आ चुकी हैं।

इसके बावजूद अभी तक तौलकांटे की जांच कर उसमें सुधार क्यों नहीं कराया गया। गुस्से में किसानों ने काफी देर तक मंडी का कामकाज ठप कर दिया। किसानों का हंगामा बढ़ता देख मंडी की ओर से पुलिस को बुलाया गया।

मौके पर पहुंची सिविल लाइन थाना प्रभारी भूमिका दुबे और अन्य कर्मचारियों ने किसी तरह समझा-बुझाकर किसानों की नाराजगी शांत की।

मंडी सचिव आरएस परिहार ने बताया कि शीघ्र ही मंडी समिति की बैठक बुलाकर बड़े तौल कांटे के बाद कटने वाली हम्माल-तुलावटी मामले का निराकरण कर उचित निर्णय लिया जाएगा। बड़े तौलकांटे की नापतौल अधिकारी को बुलाकर जांच करवाई जा रही है। नाराज किसानों के हंगामे के कारण बोली रुकी रही।

उपज कम निकलने पर हुआ हंगामा : सोमवार दोपहर 1 बजे कृषि उपज मंडी दतिया में किसान प्रमोद दांगी ने गेहूं की बोली के बाद, ट्रैक्टर ट्राली में भरी गेहूं की फसल की तुलाई कराने मंडी में स्थित तौल-कांटे पर पहुंचे।

वहां तौल के बाद कांटे से निकली पर्ची में उनकी उपज का 75 किलो वजन कम आया। प्रमोद के मुताबिक उन्होंने अपनी गेंहूं की फसल का वजन मंडी में स्थित दूसरे कांटे पर भी कराया था।

दोनों तौल कांटे की पर्ची में वजन में अंतर देख किसान ने तौल कांटा संचालक से बात करने की कोशिश की। लेकिन संचालक ने कहा कि इसमें हम क्या कर सकते हैं यह तो मशीन है।

यह बात सुन वहां मौजूद अन्य किसान भड़क गए। किसानों का आरोप था कि तुलाई के दौरान सभी ट्राली की उपज में गड़बड़ी हुई है। हंगामा बढ़ता देख मंडी का कामकाज रुक गया। किसान का हल्ला सुन िस्थति संभालने के लिए मंडी अधिकारी मौके पर पहुंचे।

किसानों का आक्रोश देख बुलानी पड़ी पुलिस : मंडी में अपनी उपज की कम तुलाई को लेकर किसान इतने आक्रोशित थे कि मंडी प्रशासन को उन्हें संभाल पाना मुश्किल हो गया।

जिसके बाद मौके पर पुलिस को बुलाना पड़ा। कुछ ही देर में सिविल लाइन थाना प्रभारी भूमिका दुबे, मंडी सचिव आरके परिहार के साथ साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

लेकिन किसान नहीं माने। किसानों को समझाइश देकर इस संबंध उचित कार्रवाई का आश्वासन के साथ कांटे की जांच कराने की बात कही गई। तब जाकर किसान शांत हुए।

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