किसान जैविक खाद का उपयोग कर भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने से बचाएं, सम्मेलन में दी गई जानकारी

दतिया। किसान खेती में रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग कर भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रख सकते हैं। रासायनिक खाद का लगातार उपयोग भूमि की उर्वरा शक्ति कम करती है, जिसका असर उपज पर पड़ने लगता है। यह बात कृषि उपसंचालक डीके सिद्धार्थ ने कृषक भारती कोपरेटिव लिमिटेड (कृभको) के तत्वाधान में आयोजित सहकारिता सम्मेलन के दौरान कही।

उन्होंने कहाकि कृभकों द्वारा निर्मित उत्पाद तरल जैव खाद, बीज, कम्पोस्ट सभी अच्छी गुणवत्ता वाले होते हैं। तरल जैव व खाद में अनेक माईक्रो वैक्टिरिया पाए जाते है जो मिट्टी में उपलब्ध फाॅसफोरस खाद के रूप में शोषण कर पौधों की जड़ों तक पहुंचाते है। सम्मेलन में सहकारिता, कृषि विभाग के लगभग 70 अधिकारी, कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को सहायक आयुक्त सहकारी संस्थान डा. अखिलेश शुक्ला ने किसानों को तकनीकी तरीके से खेती करने तथा कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे ले इसकी जानकारी दी। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक दतिया के महाप्रबंधक विनोद भार्गव ने कृभको के उत्पादों के बारे में किसानों को जानकारी दी। आत्मा के उपसंचालक जीएस गोरख ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों की अपेक्षा अपनी फसलों में जैविक उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी।

कार्यक्रम में किसानों को सलाह दी गई कि वर्तमान समय के अनुरुप खेती के नए संसाधन व तरीकों का इस्तेमाल कर अपनी उपज बढ़ाएं ताकि खेती उनके लिए लाभ का धंधा साबित हो। किसानों को कृभकों से संबंधित प्रोडक्टस के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। कृभको के अधिकारियों ने बताया कि जैव खाद, कम्पोस्ट का उपयोग कर खेती करें। सम्मेलन में जिला विपणन अधिकारी नरेन्द्र परमार, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक रमेश कुमार, वीरेन्द्र सिंह यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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