नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा, संप्रभुता और आर्थिक स्थिरता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत ने मंगलवार को नई दिल्ली में बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों की पहली बैठक की सफल मेजबानी की। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में सभी सात सदस्य देशों—भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के गृह मंत्रियों व उच्चायुक्तों ने हिस्सा लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विश्वमित्र’ की भावना के साथ काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी एक सदस्य देश की सुरक्षा पूरे क्षेत्र की स्थिरता को मजबूती देती है। गृह मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए साझा संकल्प का आह्वान किया कि क्षेत्र के किसी भी कोने में आतंकी नेटवर्कों को पनाह, फंडिंग, प्रशिक्षण या भर्ती की कोई गुंजाइश न मिले।
‘मादक पदार्थों के व्यापार में कुछ भी गोल्डन नहीं’: अमित शाह : नशीले पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स पर प्रहार करते हुए गृह मंत्री ने क्षेत्रीय सहयोग को अनिवार्य बताया:
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डेथ ट्रैफिकिंग की संज्ञा: अमित शाह ने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग असल में ‘डेथ ट्रैफिकिंग’ (मौत का व्यापार) है। तथाकथित ‘गोल्डन ट्रायंगल’ या ‘गोल्डन क्रीसेंट’ के संदर्भ में उन्होंने दो टूक कहा कि इस जानलेवा कारोबार में कुछ भी ‘गोल्डन’ नहीं है।
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‘होल ऑफ रीजन’ दृष्टिकोण: नशीले पदार्थों की अवैध कमाई का इस्तेमाल सीधे तौर पर संगठित अपराध और टेरर फंडिंग में होता है। डार्क वेब और प्रीकर्सर केमिकल्स के खतरों को एक देश अकेले नहीं रोक सकता, इसके लिए पूरे क्षेत्र (Whole of Region) को एकजुट होकर प्रहार करना होगा।
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सहयोग के 5 प्रमुख स्तंभ: बैठक में गृह मंत्री ने पांच प्राथमिक क्षेत्रों को चिन्हित किया—मादक पदार्थ नियंत्रण, आतंकवाद-रोधी व कानूनी सहायता, भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण, साइबर सुरक्षा/जांच और सुरक्षा एजेंसियों का क्षमता निर्माण।
जामनगर में स्थापित होगा बिम्सटेक आपदा प्रबंधन केंद्र : आपदाओं से निपटने में भारत की ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने घोषणा की कि गुजरात के जामनगर में ‘बिम्सटेक आपदा प्रबंधन केंद्र’ स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र सदस्य देशों के बीच पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning), आपदा मानचित्रण, संयुक्त मॉक ड्रिल और तकनीकी नवाचार के आदान-प्रदान का प्रमुख नोडल हब बनेगा।
‘दिल्ली घोषणापत्र’ अंगीकार, 5 अहम समझौतों पर मुहर : बैठक के समापन पर सदस्य राष्ट्रों ने ऐतिहासिक ‘दिल्ली घोषणापत्र’ (Delhi Declaration) को स्वीकार किया और निम्नलिखित कार्ययोजनाओं को अंतिम मंजूरी दी:
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मानव तस्करी रोधी कन्वेंशन: पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट्स पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए साझा रूपरेखा।
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मादक पदार्थ नियंत्रण कार्ययोजना: नशीली दवाओं और प्रतिबंधित रसायनों की सीमा-पार तस्करी को रोकने के लिए संयुक्त रणनीति।
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मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर एमओयू: वित्तीय खुफिया जानकारी (Financial Intelligence) साझा करने, अवैध संपत्ति जब्ती और विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर सहमति।
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अवैध वित्तीय प्रवाह रोकथाम प्लान: हवाला और अवैध वित्तीय लेन-देन के स्रोतों व चैनलों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करना।
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प्राकृतिक आपदा समन्वय योजना: सुनामी और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत व समन्वय के मानक तय करना।

