दतिया। इंदरगढ़ क्षेत्र के ग्राम कुठौंदा में मोर सहित अन्य पक्षियों के मरने की सूचना पर मंगलवार सुबह डीएफओ प्रियांशी राठौड वन विभाग के अमले के साथ मौके पर पहुंची। इस दौरान वन विभाग की टीम को दूसरे दिन भी 4 और मोर मृत हालत में और 3 गंभीर हालत में आसपास के खेतों में पड़ी मिली। सोमवार शाम भी 3 मोर मरी हुई गांव वालों को मिली थी। इस तरह कुल 7 मोर मृत अवस्था में वन विभाग ने सुपुर्दगी में लेकर उनका पीएम कराया। जबकि गंभीर अवस्था में अस्वस्थ मिली 3 मोर का उपचार बेटनिरी चिकित्सक द्वारा किया गया।
खेतों से अन्य पक्षी जिनमें तोता, कबूतर, चिड़िया, घेंघा आदि भी मृत अवस्था में पड़े मिले हैं। पक्षियों की मौत के बाद ग्राम मंे हड़कंप मच रहा। डीएफओ ने खुद वन अमले के साथ कुठौंदा में ग्रामीणों से चर्चा कर मोरों की मौत का कारण समझने की कोशिश की, ग्रामीणों ने बताया कि गांव के ही तीन लोगों ने गेंहूं के दानों में कीटनाशक मिलाकर खेतों में डाल दिया था। जिससे मोर तथा अन्य पक्षियों की मौत हो गई ।
डीएफओ ने ग्रामीणों के बयान दर्ज कर पंचनामा तैयार करवाया गया। उन्होंने खेत का निरीक्षण कर खेत की मिट्टी एवं गेहूं व मटर के दाने को जांच के लिए रखवाया। वहीं मृत मिली 7 मोरों का राष्ट्रीय पक्षी होने के कारण पूरे सम्मान के साथ वनविभाग की टीम द्वारा अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृत मिले 7 मोरों की पीएम रिपोर्ट के बाद दोषियों पर कार्रवाई किए जाने की बात डीएफओ ने कही है।
जिस खेत में मृत मोर व पक्षी मिले उसके मालिक मुन्ना तिवारी ने बताया कि उसके रोकने के बावजूद गांव के ही 3 लोग परसराम, नीरज कुशवाह, दिलीप कुशवाह ने उसके खेत पर कीटनाशक दवा गेंहूं के साथ मिलाकर पक्षियों का शिकार करने की मंशा से फैंकी थी। जिसके बाद यह घटना घटित हुई। मौके पर भ्रमण के दौरान जिला वन मंडल अधिकारी प्रियांशी राठौर, सेवढ़ा रेंजर चंद्रशेखर सोलंकी, सिटी रेंजर एमसी शर्मा, जीवनलाल दुबे, धर्मवीर सिंह, रामनारायण पांडे मौजूद रहे।
इस मामले में वनमंडलाधिकारी दतिया प्रियांशी राठौड ने बताया कि ग्राम कुठोंदा में दो दिन में मृत अवस्था में 7 मोर और गंभीर अवस्था में 3 मोर मिली हैं। मृत मोरों का पीएम कराने के बाद अंतिम संस्कार कराया गया है। मामले की जांच की जा रही है। दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – प्रियांशी राठौड, वनमंडलाधिकारी दतिया।

