गाज़ियाबाद। स्वच्छता और नवाचार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गाज़ियाबाद नगर निगम ने शहर में कांच के कचरे को संसाधन में बदलने की अनोखी पहल शुरू की है। स्वच्छ भारत मिशन–शहरी 2.0 के तहत स्थापित ग्लास अपसायक्लिंग सेंटर अब “वेस्ट टू बेस्ट” का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।
कचरे से बन रहे उपयोगी और सजावटी उत्पाद : शहर के विजय नगर स्थित MRF सेंटर में टूटे-फूटे कांच को नई पहचान दी जा रही है। यहां बेकार बोतलों को कैंडल स्टैंड, पेन होल्डर, ग्लास, सजावटी आइटम और बर्तनों में बदला जा रहा है। इस प्रक्रिया से न केवल कचरा कम हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।
‘3R मॉडल’ से सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा : नगर निगम ने Reduce, Reuse और Recycle (3R) के सिद्धांत पर काम करते हुए कांच के कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका है। विशेषज्ञों के अनुसार कांच 100% रिसाइक्लेबल होता है, लेकिन सही प्रबंधन के अभाव में यह वर्षों तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
बार और दुकानों को दिए गए निर्देश : इस पहल को मजबूत बनाने के लिए आबकारी विभाग के सहयोग से शहर के बार और मॉडल शॉप्स को खाली कांच की बोतलें सीधे अपसायक्लिंग प्लांट को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इससे अवैध गतिविधियों पर रोक लगने के साथ-साथ कचरा प्रबंधन भी व्यवस्थित हो रहा है।
महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का अवसर : इस प्रोजेक्ट में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं और Saarth संस्था की भागीदारी अहम है। CSR के तहत Horizon Industrial Parks के सहयोग से महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।
हर दिन 200 बोतलों को मिल रही नई जिंदगी : अपसायक्लिंग सेंटर की क्षमता प्रतिदिन करीब 200 कांच की बोतलों को प्रोसेस करने की है। घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अलग-अलग कचरा संग्रह कर इसे प्लांट तक पहुंचाया जाता है।
प्रशासन का फोकस—स्वच्छता के साथ सतत विकास : नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कांच के कचरे का वैज्ञानिक निपटान शहरी स्वच्छता के लिए बेहद जरूरी है। यह पहल न सिर्फ पर्यावरण को सुरक्षित बना रही है, बल्कि शहर को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित हो रही है।
‘टूटा कांच भी चमक सकता है’ : गाज़ियाबाद की यह पहल साबित कर रही है कि सही सोच और प्रबंधन से कचरा भी संसाधन बन सकता है। स्वच्छता, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चल रही यह मुहिम अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

