रेत ठेकेदार के कर्मचारी के तंबू में आग लगी, कोई जनहानि नहीं, जिंदा जलाने की बात को एफएसएल अधिकारी ने नकारा

दतिया। गोराघाट थाना क्षेत्र में सिंध नदी के समीप रेत ठेकेदार का कर्मचारी जब रात में सो रहा था तभी उसके तंबू में अचानक अाग लग गई। बताया जाता है कि आग लगने की घटना को जिंदा जलाने के प्रयास बताकर हवा दी गई थी, किंतु एफएसएल अधिकारी सतीश मान ने कहाकि प्रारंभिक जांच में ऐसे कोई तथ्य नहीं पाए गए हैं। एसडीओपी उपेंद्र दीक्षित ने बताया कि रविवार तड़के 4 बजे के करीब अभिषेक पुत्र सनील जब तंबू में सोया था तो गर्म हवा महसूस हुई और तेज आग का एहसास हुआ, तो वह उठकर बाहर आ गया। देखते ही देखते आग तेज हो गई और वहां रखे कागजात व रसीद कट्टे जलकर राख हो गए। तंबू और बिस्तर भी इसी आगजनी में जल गए।

एसडीओपी दीक्षित ने बताया कि अभी इस मामले में कुछ भी कहा नहीं जा सकता क्योंकि वहां पर रसोई गैस का सिलेंडर और बिजली के तार भी खुले मिल हैं। अत: अभी इस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं कि किसी व्यक्ति को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया हो। संभवता यदि कोई आग लगाते भी तो तंबू दो तरफ से खुला हुआ था, जिसमेें कोई आसानी से बाहर जा सकता है। फिलहाल इस घटना को लेकर तमाम चर्चाएं व्याप्त हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

थाना प्रभारी आरोपियों का बचाने का कर रहे प्रयास

इस मामले की जानकारी लेने के लिए गोराघाट थाना प्रभारी कमल किशोर गोयल ने फोन लगाने पर उन्होंने बताया कि यह मामला घटित तो हुआ है, पर अभी प्रथम द्ृष्टया कुछ कहा नहीं जा सकता। घटना के 10 घंटे बाद भी थाना प्रभारी को यह नहीं मालूम पड़ पाया कि यह आगजनी हादसा है या हत्या का प्रयास। इससे कई सवाल खड़े हो जाते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पूर्व ही रेत के अवैध कारोबारी थाना प्रभारी से मिलने आए थे। तब बंद कमरे में गुफ्तगू भी हुई थी। इसके बाद संभवता हो सकता है कि रेत ठेकेदार के कर्मचारी की नियत से भी इस तंबू में आग लगाई गई हो। इस संदर्भ में पुलिस ने कोई पुष्टि अभी नहीं की है। इससे पूर्व भी थाना प्रभारी गोयल के पास लांच थाने का जब प्रभार था तब भी एसडीएम अनुराग निंगवाल पर रेत माफियाओं ने हमला कर दिया था। कई दिनों तक रेत माफिया पकड़े नहीं जा सके थे, बाद में मुखबिर की सूचना मिलने पर लांच पुलिस डबरा पहुंची थी, तब आरोपितों ने पुलिस के साथ मारपीट भी की थी। अत: ऐसे िस्थति में रेत ठेकेदार के कर्मचारी के तंबू में आग लगाने की घटना में पुलिस का प्रश्रय हो सकता है।

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