आम चुनाव-उपचुनाव 2026 : सख्ती का असर, 650 करोड़ से अधिक की नकदी व अवैध सामग्री जब्त

नईदिल्ली : आम चुनाव और उपचुनाव 2026 के मद्देनजर सख्त निगरानी और आदर्श आचार संहिता के कड़ाई से पालन के बीच देशभर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई सामने आई है। भारत निर्वाचन आयोग की निगरानी में अब तक 650 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य प्रलोभन सामग्री जब्त की गई है। यह कार्रवाई 26 फरवरी 2026 से शुरू हुई विशेष निगरानी व्यवस्था के तहत 5 अप्रैल 2026 तक की गई है, जो चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

आयोग ने 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव तथा छह राज्यों में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पुलिस और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया को धनबल, बाहुबल और किसी भी प्रकार के प्रलोभन से मुक्त रखा जा सके।

निर्वाचन आयोग ने चुनावी राज्यों के साथ-साथ उनके सीमावर्ती राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कर हालात पर नजर बनाए रखी है। इन बैठकों में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य उच्च अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि चुनाव पूरी तरह हिंसा मुक्त, दबाव मुक्त और पारदर्शी तरीके से संपन्न हों।

सख्त निगरानी व्यवस्था लागू : चुनावी राज्यों में 5,000 से अधिक उड़न दस्ते (फ्लाइंग स्क्वॉड) तैनात किए गए हैं, जिन्हें शिकायत मिलने के 100 मिनट के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश हैं। इसके अलावा 5,200 से अधिक स्थैतिक निगरानी दल (स्टैटिक सर्विलांस टीम) विभिन्न स्थानों पर नाकेबंदी कर वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा जब्ती इन राज्यों में : आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 319 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई है, जिसमें नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और कीमती धातुएं शामिल हैं। इसके बाद तमिलनाडु में 170 करोड़ और असम में 97 करोड़ रुपये से अधिक की सामग्री जब्त की गई है। केरल और पुडुचेरी में भी उल्लेखनीय कार्रवाई की गई है।

नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान : आयोग ने स्पष्ट किया है कि सख्ती के दौरान आम नागरिकों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए जिला स्तर पर शिकायत निवारण समितियां गठित की गई हैं, जहां लोग अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।

शिकायत के लिए डिजिटल सुविधा : चुनाव के दौरान किसी भी तरह के आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत नागरिक और राजनीतिक दल ‘सी-विजिल’ ऐप के माध्यम से कर सकते हैं। आयोग का दावा है कि इस प्रणाली के जरिए शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

निर्वाचन आयोग की यह सख्ती साफ संकेत दे रही है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

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