दतिया : पंडोखर पीठाधीश्वर गुरु शरण महाराज के सानिध्य में श्रद्धा मंच पर भव्य दरबार का आयोजन हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और गुरु शरण महाराज के उपदेशों का लाभ लिया। कार्यक्रम में साधु-संत, महंत और अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया।

पूर्वजों के सम्मान और संतुष्टि पर दिया जोर : अपने संबोधन में गुरु शरण महाराज ने कहा कि जीवन में आने वाली अनेक समस्याओं का संबंध केवल वर्तमान से नहीं, बल्कि पूर्वजों से भी जुड़ा होता है। उन्होंने बताया कि जब परिवार में कलह, बाधाएं या अन्य परेशानियां बढ़ती हैं, तो व्यक्ति भगवान की शरण में जाता है, लेकिन पूर्वजों की उपेक्षा कर देने से समाधान अधूरा रह जाता है। उनका कहना था कि ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अपने पूर्वजों को संतुष्ट करना आवश्यक है, तभी जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
सात्विक परंपराओं के पालन का संदेश : गुरुजी ने बलि प्रथा के विषय में स्पष्ट करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में किसी जीव की हत्या करना पाप माना गया है। इसलिए श्रद्धालुओं को सात्विक बलिदान की परंपरा अपनानी चाहिए, जिससे पूर्वजों की तृप्ति हो सके और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था के साथ किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
भक्तों की समस्याओं का किया समाधान : पर्ची दरबार के दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी समस्याएं प्रस्तुत कीं, जिन पर गुरु शरण महाराज ने मार्गदर्शन दिया। इस दौरान भूत-प्रेत बाधा, पारिवारिक कलह और जीवन से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान भी बताए गए। श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक अनुभव बताते हुए अपनी आस्था प्रकट की।
राम कथा में भक्तों ने लिया धर्म का रसास्वादन : इसी अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा में कथा व्यास पंडित पवन शास्त्री ने भगवान राम के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। कार्यक्रम के अंत में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया।

