दतिया. क्षेत्र के किसानों के लिए यह एक खुश खबरी है कि दतिया जिले के समीपस्थ ग्राम एरई के निजी शुगर फैक्ट्री ने क्षेत्र के किसानों के लिए उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के गन्ने की उच्चतम किस्म को अपने यहां उगाने में सफलता प्राप्त की है। इस प्रकार का गन्ना यदि दतिया जिले के किसान लगाते हैं, तो उन्हें इससे कई लाभ होंगे। इनमें से मुख्य रूप से उनके गन्ने की पैदावार बढ़ेगी, वहीं गन्ने में मिठास की मात्रा बढ़ने के साथ गुड एवं शक्कर की मात्रा भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा मिलेगी। इस गन्ने के प्रजाति की खास बात यह है कि गन्ने की लंबाई 16 फीट से अधिक है, जो कि आमतौर पर इस क्षेत्र में नहीं होती है। दतिया जिले व आसपास क्षेत्रों में पैदा होने वाला गन्ना लगभग 6 फीट से 10 फ़ीट तक का ही होता है। इसी वजह से उन्नत किस्म के गन्ने की उपार्जन भी ज्यादा मिलना तय है।
जानकारी के अनुसार गन्ने की खेती की बुबाई वर्ष में दो बार अक्टूबर, नवम्बर और फरवरी-मार्च माह में की जाती है। दतिया सहित आसपास के जिलों में वर्तमान में प्रचलित गन्ने की प्रजाति सीओएस 1148 व सीओएस 7717 मुख्य है। क्षेत्र का किसान अधिकांश इसी क्वालिटी के गन्ने की बुबाई करता है। जिले में यदि वे गन्ने की इस नई किस्म की पैदावार लें तो धान और गेहूं की तुलना में भी उन्हें दोगुना लाभ मिल सकता है।
डोलेक्स शुगर फैक्ट्री में किया गया प्रयोग
डोलेक्स शुगर इंडस्ट्रीज एरई के महाप्रबंधक (गन्ना विकास) धर्मेंद्र राठी बताते हैं कि दतिया और आसपास के क्षेत्र का तापमान उत्तर प्रदेश के गन्ना बाहुल्य उत्पादन क्षेत्रों जैसा है। यहां के मौसम में आद्रता भी पर्याप्त मात्रा में है। इसके साथ ही क्षेत्र की मिट्टी यूपी के गन्ना क्षेत्र से कहीं ज्यादा अच्छी है। हरियाणा स्थित करनाल के गन्ना रिसर्च सेंटर ने भी यहां की मिट्टी को गन्ने के उत्पादन के योग्य बताया है। आमतौर पर इस क्षेत्र में गन्ने की फसल की लंबाई 10 फीट से ज्यादा नहीं होती है। गन्ने की उन्नत किस्म सीओ-8005, सीओ-118, सीओ-8272, सीओ-12029 तथा सीओएस- 0239 लगाई जाती है तो क्षेत्र के किसानों को गन्ने की उपज से शक्कर और गुड़ दोनों ही ज्यादा मात्रा में मिलेंगे। वर्तमान में यह किस्मे संपूर्ण उप्र में लगाई जा रही है। इन किस्मों को फैक्ट्री परिसर में भी सफलतापूर्वक लगाकर किसानों के अवलोकन के लिए रखा गया है।
उन्नत किस्म के गन्ने से बढ़ जाएगी गुड और शक्कर मात्रा
क्षेत्र में वर्तमान में सात हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल ली जाती है। इसके अलावा तीन हजार हेक्टेयर की फसल ग्वालियर तथा 2 हजार हेक्टेयर की गन्ने की फसल शिवपुरी क्षेत्र में किसानों द्वारा ली जाती है। किसान इस उन्नत किस्मों को खेत में लगाता है तो इसके साथ ही वह गेंहू, आलू, प्याज, लहसून, मैथी, सरसों आदि कि अंतर्वर्ती फसल भी साथ लगा सकता है। बताया जाता है कि इस उच्च किस्म का गन्ना लगाने से जहां 1 क्विंटल गन्ने से 13 से 15 किलो से अधिक गुड़ तथा 10 से 11 किलो शक्कर प्राप्त की जा सकती है, जबकि यहां के किसानों द्वारा बोई गई परंपरागत गन्ने की किस्म से 10 से 13 किलो गुड़ तथा 8 से 10 किलोग्राम शक्कर ही मिल पाती है।
दतिया जिले गन्ने की पैदावार का आमतौर पर गुड के कोल्हू (क्रेशर) में उपयोग किया जाता है। वर्तमान में 463 गुड के कोल्हू यहां लगे हुए हैं। प्रदेश सरकार का कृषि विभाग भी इस संदर्भ में किसानों को प्रेरित कर रहा है कि वह गन्ने की खेती के लिए नए किस्म का उपयोग करें। कुछ किसानों ने गन्ने की उन्नत खेती करना शुरू भी कर दिया है। वर्तमान में यदि पूरी तरह से गन्ने की उन्नत खेती की जाती है तो जिले सहित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदलते देर नहीं लगेगी।

