बिजली संयंत्रों में कोयला संकट की खबरों पर सरकार का स्पष्टीकरण: अक्टूबर में आपूर्ति 36% तक सुधरी, रोजाना 465 से अधिक मालगाड़ियों से हो रही ढुलाई

नई दिल्ली। देश के ताप विद्युत गृहों (थर्मल पावर प्लांट्स) में कोयले के कम भंडार को लेकर सामने आ रही मीडिया रिपोर्टों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि देश में बिजली संकट का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सितंबर के निचले स्तर की तुलना में अक्टूबर माह में बिजली क्षेत्र को होने वाली दैनिक कोयला आपूर्ति में करीब 36 प्रतिशत का सुधार आया है, जिससे स्टॉक की स्थिति तेजी से स्थिर हो रही है।

​मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ‘क्रिटिकल स्टॉक’ का दर्जा केवल एक मानक संकेतक (Early Warning System) है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी प्लांट में ईंधन की वास्तविक कमी होने या बिजली उत्पादन प्रभावित होने से बहुत पहले ही संबंधित प्रबंधन को सतर्क करना होता है। इस श्रेणी में नाम आने का मतलब यह कतई नहीं है कि संबंधित संयंत्र में ईंधन खत्म हो गया है या वह बंद होने की कगार पर है।

​सितंबर के मुकाबले सुधरे हालात: आंकड़ों से समझें स्थिति : कोयला मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार आपूर्ति और लोडिंग दोनों मोर्चों पर सुधार दर्ज किया गया है:

  • ​दैनिक आपूर्ति में 36% की वृद्धि: सितंबर माह में आपूर्ति सबसे निचले स्तर पर थी, जिसके मुकाबले अब पावर सेक्टर को होने वाली दैनिक आपूर्ति लगभग 36 प्रतिशत बढ़ी है। अक्टूबर में औसत आपूर्ति पिछले महीने से 9 प्रतिशत अधिक चल रही है।
  • ​स्टॉक घटने की रफ्तार आधी हुई: सितंबर में बिजली संयंत्रों से प्रतिदिन 0.243 मिलियन टन (MT) कोयला भंडार घट रहा था, जो अब अक्टूबर में घटकर 0.116 मिलियन टन प्रतिदिन रह गया है। इससे गिरावट का क्रम रुका है और भंडार स्थिर हो रहा है।
  • ​रेलवे से रिकॉर्ड लोडिंग: अक्टूबर में प्रतिदिन औसतन 465 से अधिक रेलवे रेक (मालगाड़ियों) के जरिए कोयले की ढुलाई की जा रही है। लगातार तीन दिनों तक प्रतिदिन 470 रेक लोड करने का लक्ष्य भी हासिल किया गया है। इसके अलावा सड़क मार्ग से होने वाले परिवहन में भी इजाफा हुआ है।

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