नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
सरकार ने साफ किया है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए अकेले इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। इसके पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी और कुछ स्तर पर जमाखोरी व सट्टेबाजी जैसे कारण बताए गए हैं।
अनुमान से कम रहा चीनी उत्पादन : मौजूदा सीजन में देश में करीब 306 लाख टन (LMT) चीनी उत्पादन का अनुमान है। यह गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT से कम है।
गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ अधिक बारिश और जलभराव का भी उत्पादन पर असर पड़ा है। हालांकि सरकार का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है।
वैश्विक बाजार में भी बढ़ी कीमत : चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी केवल भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के मुताबिक, 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 LMT चीनी की कमी का अनुमान है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में कीमत में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
इथेनॉल से किसानों और चीनी मिलों को मिला फायदा : सरकार ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम के कारण अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने का विकल्प मिला है। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और किसानों के भुगतान में भी सुधार आया।
20 अगस्त 2026 तक 2025-26 चीनी सीजन के गन्ना किसानों के 97 प्रतिशत बकाये का भुगतान किया जा चुका है।
सरकार के अनुसार, चीनी उद्योग को 2014 से 2021 के बीच करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, जबकि 2021-22 के बाद ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है।
जमाखोरी पर सरकार की नजर, 400 टन की स्टॉक लिमिट : बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर निगरानी बढ़ा दी है। इसके तहत:
- 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की गई है।
- 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता 15 दिन की जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
- केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन कर रही हैं।
- जमाखोरी और बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की गतिविधियों की जांच की जा रही है।
10 लाख टन कच्ची चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात : त्योहारी सीजन में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला किया है।
इसके अलावा, राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 LMT के मुकाबले बढ़कर 10 LMT से अधिक हो सकता है।
सरकार का कहना है कि वह चीनी की कीमतों, स्टॉक और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम आगे भी जारी रखे जाएंगे।

