गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस GeM ने रचा नया कीर्तिमान : 18.4 लाख करोड़ का जीएमवी पार, डिजिटल खरीद प्रणाली में बना भरोसे का मंच

नई दिल्ली  : सरकारी खरीद प्रणाली को पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल करते हुए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये के सकल व्यापार मूल्य (GMV) का आंकड़ा पार कर लिया है। खास बात यह है कि केवल वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का GMV दर्ज किया गया, जो इस प्लेटफॉर्म की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता और प्रभाव को दर्शाता है। यह उपलब्धि GeM को देश में एक मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद डिजिटल सार्वजनिक खरीद मंच के रूप में स्थापित करती है।

GeM न केवल सरकारी विभागों के लिए खरीद प्रक्रिया को सरल और तेज बना रहा है, बल्कि विभिन्न वर्गों के उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़कर आर्थिक समावेशन को भी बढ़ावा दे रहा है। प्लेटफॉर्म की इस सफलता के पीछे खरीदारों, विक्रेताओं और संस्थानों का बढ़ता विश्वास भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

एमएसएमई और महिला उद्यमियों को मिला बड़ा लाभ : GeM पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल ऑर्डरों में से 68 प्रतिशत एमएसई द्वारा पूरे किए गए, जो कुल GMV का 47.1 प्रतिशत है। वर्तमान में प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक एमएसई पंजीकृत हैं, जिन्हें 2.36 लाख करोड़ रुपये के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।

महिला उद्यमियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। 2.1 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम GeM से जुड़े हैं, जिन्हें 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर मिले हैं। वहीं, अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। स्टार्टअप्स ने भी 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

तकनीक से मजबूत हो रही पारदर्शिता : GeM प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से कैटलॉग सत्यापन, लेनदेन की निगरानी और अनियमितताओं की पहचान को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

साथ ही, उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों के जरिए संदिग्ध बोली प्रक्रियाओं, असामान्य मूल्य निर्धारण और संभावित मिलीभगत जैसे मामलों पर नजर रखी जा रही है, जिससे पूरी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा मजबूत हुआ है।

राज्यों की भागीदारी में भी तेजी : केंद्रीय संस्थानों के साथ-साथ अब राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्यों द्वारा GeM के माध्यम से की गई खरीद में 38.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि प्लेटफॉर्म अब देशभर में सार्वजनिक खरीद का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है।

कुल मिलाकर, GeM का यह विस्तार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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