नई दिल्ली। देश में बढ़ते खाद्यान्न उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की ‘सहकारिता क्षेत्र में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना’ धरातल पर बड़े बदलाव ला रही है। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत जुलाई 2026 तक देश भर के 313 पैक्स में आधुनिक गोदामों का निर्माण पूरा कर 1.80 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता सृजित की जा चुकी है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा संचालित इस पहल का मुख्य उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को रोकना और किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
उत्पादन केंद्रों के पास ही सुरक्षित होगा अनाज, घटेगी परिवहन लागत : देश में वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 376.56 मिलियन टन रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 80 करोड़ से अधिक आबादी तक अनाज पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर बर्बादी रोकने के लिए उत्पादन क्षेत्रों के निकट ही भंडारण की व्यवस्था की जा रही है। इससे खरीद केंद्रों, गोदामों और राशन की दुकानों (उचित मूल्य की दुकानों) के बीच होने वाले भारी परिवहन खर्च में बड़ी बचत हो रही है।
किसानों व समितियों को वित्तीय संबल: प्रभावी ब्याज दर मात्र 1 प्रतिशत : परियोजना की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वित्तीय नियमों में कई रियायतें दी हैं:
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सब्सिडी में बढ़ोतरी: एएमआई (AMI) योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी 25% से बढ़ाकर 33.33% की गई है।
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मार्जिन मनी में राहत: पैक्स के लिए मार्जिन मनी की अनिवार्यता 20% से घटाकर 10% कर दी गई है।
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सस्ता कर्ज: नाबार्ड (NABARD) की विशेष पुनर्वित्त सुविधा और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) की 3% ब्याज छूट मिलने के बाद पैक्स के लिए प्रभावी ऋण ब्याज दर घटकर मात्र 1% रह जाती है।
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एफसीआई (FCI) की गारंटी: निर्मित गोदामों को भारतीय खाद्य निगम द्वारा शर्तों के अधीन अनिवार्य रूप से किराए पर लेने का प्रावधान किया गया है, जिससे समितियों की नियमित आय सुरक्षित रहेगी।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी कृषि सेवाएं : यह मॉडल पैक्स को बहुउद्देश्यीय ग्रामीण सेवा केंद्रों के रूप में विकसित कर रहा है। इन केंद्रों पर भंडारण के साथ-साथ :-
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कस्टम हायरिंग सेंटर: ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और आधुनिक उपकरण किराए पर उपलब्ध होंगे।
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प्राथमिक प्रसंस्करण: अनाज की ग्रेडिंग, सफाई और सुखाने की आधुनिक यूनिट्स लगेंगी।
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उपज पर अग्रिम ऋण: किसान अपनी फसल गोदाम में रखकर उसके एवज में तुरंत अग्रिम राशि ले सकेंगे, जिससे उन्हें बाजार में तत्काल कम दामों पर फसल बेचने के लिए विवश नहीं होना पड़ेगा।
अमरावती का नेरपिंगलाई मॉडल बना मिसाल : महाराष्ट्र के अमरावती स्थित नेरपिंगलाई पैक्स ने इस योजना का सफल क्रियान्वयन करते हुए 3,000 मीट्रिक टन का गोदाम तैयार किया है। यहां लगभग 300 किसानों की 32 हजार सोयाबीन की बोरियां भंडारित की गई हैं। पैक्स ने किसानों को फसल के बदले 4.50 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी, जिससे वे संकटपूर्ण बिक्री से बच गए। समिति को इस व्यवस्था से किराए और ब्याज के रूप में प्रतिवर्ष 60 लाख रुपये से अधिक की अनुमानित आय हो रही है।
11 राज्यों के ट्रायल से बढ़कर 1,012 पैक्स तक विस्तार : मई 2023 में 11 राज्यों (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान आदि) में 9,750 मीट्रिक टन की प्रायोगिक शुरुआत के बाद अब तक 1,012 पैक्स की पहचान की जा चुकी है। सभी गोदामों में भंडारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (WDRA) के मानकों का पालन और अनिवार्य ‘ग्रेन स्टोरेज’ लोगो व ब्रांडिंग लागू की गई है, जिससे देश में पारदर्शी व मजबूत कृषि अवसंरचना तैयार हो रही है।

