नए जिलाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह परिहार का स्वागत : आशुतोष से मिले गले, डॉ. नरोत्तम मिश्रा के छुए पैर; दो गुटों में बंटी नजर आई भाजपा !

दतिया। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह परिहार का बुधवार को दतिया आगमन पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा गर्मजोशी से  स्वागत किया गया।  नए जिलाध्यक्ष के सम्मान में शहरभर में तोरणद्वार, होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए । स्वागत कार्यक्रम के दौरान शहर के प्रमुख स्थानों पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अलग-अलग टोलियां नजर आने की बात सामने आई। रेलवे स्टेशन से लेकर राजगढ़ चौराहे तक लगाए गए बैनर और पोस्टरों में भी नेताओं की तस्वीरों को लेकर एकरूपता नहीं दिखने की चर्चा रही।

आशुतोष से मिले गले, डॉ. नरोत्तम मिश्रा के छुए पैर : दतिया में नए जिलाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह परिहार ने सभी कार्यकर्ताओं और नागरिकों से पूरी आत्मीयता से मुलाकात की, जहां उन्होंने आशुतोष तिवारी से गले मिलकर एकजुटता दिखाई, वहीं मंदिर पीताम्बरा पीठ में विधि-विधान से दर्शन, पूजन व अर्चना की। इसके साथ ही वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भी नए जिलाध्यक्ष का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिस दौरान माधवेन्द्र सिंह परिहार ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया.

स्वागत के बीच दो गुटों में बंटी दिखी भाजपा, पोस्टरों की सियासत ने खोली गुटबाजी की पोल : पूरे स्वागत समारोह और ताजपोशी के दौरान सबसे विचारणीय और चर्चा का विषय यह रहा कि भारी उत्साह के बावजूद दतिया भाजपा की अंदरूनी दरार छिप नहीं सकी। पार्टी स्पष्ट रूप से दो खेमों में विभाजित नजर आई—एक ओर पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का वाला गुट था, तो दूसरी ओर हालिया उपचुनाव में प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी का खेमा। हालांकि नए जिलाध्यक्ष ने दोनों वरिष्ठ नेताओं से मिलकर संतुलन साधने का प्रयास किया, लेकिन जमीन पर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं की दूरियां साफ तौर पर महसूस की गईं।

बैनर-पोस्टरों की जंग: गायब रहे विरोधी नेताओं के चेहरे : कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह अंदरूनी खींचतान केवल नारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहर भर में लगे होर्डिंग्स और पोस्टरों में खुलकर सामने आई। स्टेशन से लेकर राजगढ़ चौराहे तक लगे बैनरों में एकरूपता पूरी तरह नदारद थी; जहां नरोत्तम मिश्रा समर्थकों के पोस्टरों से आशुतोष तिवारी का नाम और फोटो गायब थे, वहीं दूसरे खेमे के पोस्टरों से भी वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें गायब दिखीं। यह खुला शक्ति प्रदर्शन और पोस्टरों की सियासत इस बात का साफ संकेत है कि उपचुनाव की हार के बाद पैदा हुआ असंतोष अब भी सुलग रहा है, जिसे साधकर पूरी पार्टी को एक जाजम पर लाना नए जिलाध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।

एक ही समय पर पहुंचे दिग्गज : एक ओर जहां माधवेन्द्र सिंह परिहार का काफिला शहर में प्रवेश कर रहा था, वहीं दूसरी ओर पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी पंजाब मेल (जो करीब 1 घंटा 15 मिनट की देरी से शाम 4:15 बजे दतिया स्टेशन पहुंची) से शहर पहुंचे। स्टेशन पर उनके समर्थकों का भारी जमावड़ा नजर आया।

● उपचुनाव के बाद संगठन को एकजुट करने की बड़ी चुनौती : दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद से ही जिले में भाजपा का आंतरिक शक्ति संतुलन संवेदनशील दौर से गुजर रहा है:

● टिकट वितरण और हार के बाद का घटनाक्रम: जुलाई में हुए उपचुनाव के दौरान पार्टी ने आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया था, जिसके बाद असंतोष और इस्तीफों का दौर देखने को मिला था। 3 अगस्त को आए चुनाव परिणामों में भाजपा की पराजय के बाद प्रदेश नेतृत्व ने तत्कालीन जिला कार्यकारिणी को सिरे से भंग कर दिया था

नए जिलाध्यक्ष की कठिन डगर : 22 सितंबर को कमान संभालने वाले माधवेन्द्र सिंह परिहार के सामने अब सबसे बड़ा संकट यह है कि वे इन दो ध्रुवों के बीच समन्वय कैसे बैठाएंगे। आने वाले दिनों में जब नई जिला कार्यकारिणी और मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति होगी, तब दोनों गुटों को साधते हुए सर्वमान्य टीम तैयार करना उनके राजनीतिक कौशल की सबसे कड़ी परीक्षा साबित होगी।

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