रेल भूमि पर अतिक्रमण से संवेदनशीलता के साथ निपटा जा रहा है : संसद में बोले रेल मंत्री

नईदिल्ली : रेल्वे की भूमि पर अतिक्रमण को पुरानी समस्या करार देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में कहाकि इससे संवेदनशीलता और संवेदना के साथ निपटा जा रहा है और ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा जिससे किसी व्यक्ति की परेशानी अचानक बढ़ जाए।

रेल मंत्री ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण पुरानी समस्या है और दो-तीन राज्यों के साथ मिलकर रेलवे ने अच्छे तरीके से काम किया है।

उन्होंने कहा कि मुंबई में राज्य सरकार के साथ मिलकर अच्छे तरीके से अतिक्रमण को हटाया गया है और गुजरात में सूरत के उधना में भी राज्य के साथ मिलकर इसे हटाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण की इस समस्या से संवेदना और संवेदनशील तरीके से निपटा जा रहा है और ऐसा कोई कोई कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे किसी पर अचानक मार पड़े।

कोरोना महामारी के दौरान प्लेटफार्म टिकटों की कीमतों में वृद्धि किए जाने की सदस्यों की शिकायत के संबंध में वैष्णव ने कहाकि अब देश भर में इनकी कीमतें सामान्य स्तर पर हैं।

उन्होंने कहा कि 30-40 साल से रेलवे के डीआरएम (डिविजनल रेलवे मैनेजर) को यह अधिकार है कि वे अपने क्षेत्र में स्टेशनों पर भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी तौर पर प्लेटफार्म टिकटों के दाम बढ़ा सकते हैं। लेकिन अब बढ़ाई गयी कीमतें कम कर दी गई हैं।

उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2021 की स्थिति के अनुसार कुल 810.31 हेक्टेयर रेल भूमि पर अतिक्रमण किया गया था। जिसमें गरीब लोगों द्वारा किया गया अतिक्रमण शामिल है।

पिछले तीन वर्षों यानी 2018, 2019, 2020 एवं मौजूदा वर्ष अर्थात 2021 (नवंबर तक) के दौरान रेल सुरक्षा बल के सहयोग से इंजीनियरिंग विभाग द्वारा कुल 5290 संयुक्त अभियान चलाए गए थे। जिनमें रेल क्षेत्र से कुल 10,832 अतिक्रमण हटाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान भारतीय रेल ने कोई स्टेशन बंद नहीं किया है।

देश भर में लागू लॉकडाउन के तहत रेलवे ने 23 मार्च 2020 से सभी यात्री गाड़ियों का परिचालन बंद कर दिया था। लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों तक जरुरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मालगाड़ियां बंद नहीं की गई थीं।

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