तिरुअनंतपुरम : केरल में पिछले दिनों दहेज हत्या के लगातार कई मामले सामने आने के बाद इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक पहल हुई है।
राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने बुधवार को राजभवन में एक दिवसीय उपवास रखा। राज्य के इतिहास में यह पहला मौका है जब राज्यपाल ने सामाजिक कल्याण के लिए उपवास रखा है।
विपक्षी कांग्रेस व भाजपा ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनजागरूकता के लिए राज्यपाल की तरफ से उठाए गए गांधीवादी कदम का समर्थन किया।
साथ ही कहा कि राज्य की पिनराई विजयन की नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार महिलाओं की सुरक्षा में विफल रही है और इसी वजह से राज्यपाल को उपवास के लिए मजबूर होना पड़ा।
भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘राज्यपाल को बधाई जो केरल में महिला व लड़कियों की सुरक्षा के लिए उपवास रख रहे हैं।’ उन्होंने राज्यपाल के कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि शायद यह देश के प्रशासनिक इतिहास का ‘दुर्लभ प्रकरण’ है।
मुरलीधरन ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि राज्यपाल को महिला सुरक्षा के लिए उपवास क्यों रखना पड़ा।
केरल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के. सुधाकरण ने दवा किया कि राज्य के लोगों की सुरक्षा में सरकार की विफलता के कारण ही राज्यपाल को यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने उपवास को ‘दुर्लभ घटना’ बताते हुए कहा कि राज्यपाल ने ‘उचित मुद्दे’ को उठाया है।
कन्नूर के सांसद ने कहा, ‘केरल में अब यह स्थिति हो गई है कि राज्यपाल को विरोध के लिए गांधीवादी रास्ता अपनाना पड़ रहा है। राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती है।’
इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए राज्यपाल खान ने राजभवन में सुबह आठ बजे उपवास शुरू किया और लोगों से दहेज प्रथा को समाप्त करने की अपील की। उपवास शाम छह बजे तक चला।
उनके समर्थन में लोगों ने गांधी भवन में गांधी समर्थक निधि के तत्वावधान में उपवास किया। पिछले महीने खान ने महिलाओं से शादी के समय दहेज की मांग न करने और इस कुप्रथा के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने की अपील की थी।
उन्होंने यह अपील मेडिकल छात्रा विस्मया के घर जाने के बाद की थी, जो दहेज उत्पीड़न की शिकायत करने के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में कोल्लम जिले में अपने पति के घर मृत पाई गई थी।


