बुर्जुर्गों के स्वागत के लिए सजाए अस्पताल, टीका लगवाने पहुंचे वृद्धों को पहनाई माला, फिर भी रफ्तार सुस्त

दतिया ।  जब बुजुर्गों की बारी आई तो टीकाकरण की रफ्तार धीमी पड़ गई। जिसे लेकर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया। टीकाकरण की िस्थति संभालने के लिए विभिन्न स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जिले में बुधवार को 800 टीके लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया। इसके लिए भांडेर, बसई, इंदरगढ़, सेवढ़ा सहित दतिया शहर में कुल सात केंद्र बनाए गए। टीकाकरण के लिए वृद्धजनों में उत्साह के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसई में इस कार्य के दौरान नई पहल की गई। कोरोना की बैक्सीन लगाने से पहले सभी वृद्धजन का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया गया। यहां बुजुर्गें को प्रोत्साहित करने के लिए पूरे अस्पताल सजाया गया था।

जहां बुजुर्गों को टीकाकरण के लिए अब आशा कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर से प्रोत्साहित कर केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा इंदरगढ़ व भांडेर में जिला प्रशासन की ओर से पार्षदों की एक बैठक रखी गई, जिसमें बुजुर्गों को प्रोत्साहित करने के लिए योजना बनाई गई। इसके साथ ही करोना के टीकाकरण को लेकर गली-मोहल्लों में प्रचार वाहन दौड़ाए गए। जो ऑडियो के माध्यम से टीकाकरण का महत्व समझा रहा है।

सिर्फ पहचान पत्र लाएं और लगवाएं वैक्सीन

अब बुजुर्ग को टीके के लिए किसी लिंक पर जाने की जरूरत नहीं है। जिला प्रशासन ने अस्पताल में व्यवस्थाएं की गई है कि सभी केंद्र जहां पर कोरोना का टीकाकरण किया जा रहा है वहां पर बुजुर्ग अपना पहचान पत्र लाएं और उससे सीधे कोरोना का टीका लगा दिया जाएगा। इसमें आधार कार्ड, बैंक पासबुक, वोटर आईडी पहचान पत्र के रूप में मान्य होगा। पूर्व में लिंक और ऐप के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की गई थी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने ब्लाक मेडिकल आफिसर को प्रत्येक गांव में इसके लिए एक योजना बना कर दी है। जिसके तहत टीकाकरण केंद्र तक बुजुर्ग आने के लिए प्रोत्साहित हों, इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ऑडियो भेजा गया है, जो वाहन पर लाउड स्पीकर के साथ बजाकर कोरोना टीके का प्रचार प्रसार करेगा।

800 में से सिर्फ 453 को ही लगे टीके

बुधवार को 800 टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें से मात्र 453 लोग ही जिले के कुल 7 केंद्रों पर पहुंचे। बता दें कि 60 वर्ष एवं 40 से 59 वर्ष के टीकाकरण का लक्ष्य 1400 लोगों का दिया गया था, उसमें भी नाममात्र के लोगों ने ही टीका लगवाया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने प्रोत्साहन के लिए अलग-अलग तरीके अपनाना शुरू कर दिए हैं।

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