जीवन में कुछ पाना है तो झुककर ही पाया जा सकता है- मुनिश्री

दतिया. झुकने से विकास और अकड़ने से विनाश होता है। यदि जीवन में कुछ पाना है तो झुककर ही पाया जा सकता है। जैसे हैंडपंप का हैंडिल बार-बार नीचे झुकाने पर ही पानी आता है। मंदिरों के छोटे दरवाजे हमें यही शिक्षा देते है कि झुकना सीखो। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर ने सोमवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुप्षदंत सागर सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि आदमी के क्रियाकलाप को देखकर लगता है कि वह कभी नहीं मरेगा। जबकि पल भर का भरोसा नहीं । ऐसे में हजार काम छोड़कर सत्संग, धर्माचरण करना चाहिए। यही जीवन का सार है। मुनिश्री ने कहा कि धर्म, अर्थ, काम औैर मोक्ष यह पुरुषार्थ कहे जाते हैं। संसार का सुख या मुक्ति का सुख जब भी मिलेगा पुरुषार्थ से ही मिलेगा। जितने भी जीव सिद्ध हुए हैं या प्रसिद्ध हुए हैं सबने मेहनत और पुरुषार्थ करके ही सफलता पाई है। मुनिश्री ने कहा कि जीवन के अंत से पहले संत व प्रभु की शरण को स्वीकार कर लो। क्योंकि जीवन का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए धर्म को कल परसों पर मत टालो। आज इसी समय से प्रारंभ कर दो। उन्होंने कहाकि आप बड़ा बनना चाहते हो पर छोटा बनना आपको पसंद नहीं है। छोटे बनकर आप बड़े बनने की राह पर नहीं चलोगे तो आप बड़े नहीं बन सकते। इसलिए बड़े नहीं छोटे बनो, दुनिया आपको अपने आप बड़ा बना देगी। धर्मसभा का संचालन अशोक पिड़रौआ ने किया। चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजित किए जा रहे हैं।

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