भारत-भूटान की जल साझेदारी को नई रफ्तार : सीमा पार नदियों, बाढ़ पूर्वानुमान और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर बढ़ा सहयोग

नई दिल्ली :  भारत और भूटान ने सीमा पार नदियों, बाढ़ प्रबंधन और जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग के सचिव वीएल कंथा राव के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 24 से 27 फरवरी तक भूटान का दौरा किया।

इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्र के साथ-साथ असम और पश्चिम बंगाल के अधिकारी तथा WAPCOS Limited के प्रतिनिधि शामिल थे। दौरे का मुख्य उद्देश्य सीमा पार नदियों से जुड़े सहयोगी तंत्र की समीक्षा और भूटान में भारत की साझेदारी से चल रही जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करना था।

बाढ़ प्रबंधन और डेटा साझाकरण पर चर्चा : 25 फरवरी को हुई सचिव स्तर की बैठक में दोनों देशों ने बाढ़ पूर्वानुमान और बाढ़ प्रबंधन के मौजूदा तंत्र की समीक्षा की। भविष्य की रणनीति में सीमा पार नदियों पर जल-मौसम विज्ञान नेटवर्क को आधुनिक बनाने, डेटा साझाकरण को और प्रभावी बनाने तथा तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

बैठक में जलवायु परिवर्तन, हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (GLOF) और चरम मौसम की घटनाओं से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

जलविद्युत परियोजनाओं की समीक्षा : दौरे के दौरान सचिव ने निर्माणाधीन Punatsangchhu-I Hydroelectric Project और हाल ही में शुरू हुई Punatsangchhu-II Hydroelectric Project का निरीक्षण किया। परियोजना अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्य प्रगति की जानकारी ली गई।

इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने थिम्फू स्थित National Center for Hydrology and Meteorology और वांगडू फोड्रंग के पास स्थित बाढ़ निगरानी केंद्र का भी दौरा किया।

उच्चस्तरीय मुलाकात : द्विपक्षीय बैठक के बाद सचिव ने भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री Lyonpo Gem Tshering से शिष्टाचार भेंट की।

दोनों देशों ने साझा नदी बेसिनों के सतत और पारस्परिक रूप से लाभकारी प्रबंधन के लिए मिलकर काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने जल संसाधन प्रबंधन और तकनीकी सहयोग में निरंतर समर्थन का आश्वासन भी दिया।

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