नई दिल्ली। दुनिया के चार महाद्वीपों में फैले 11 शक्तिशाली सदस्य देशों के समूह ब्रिक्स (BRICS) के 18वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में करने जा रहा है। समूह की स्थापना के बाद यह चौथा अवसर है जब भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसे “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” की केंद्रीय थीम के साथ आगे बढ़ाया गया है। वर्ष 2024 और 2025 में हुए ऐतिहासिक विस्तार के बाद यह पहला मौका है जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और हाल ही में 11वें सदस्य के रूप में जुड़े इंडोनेशिया सहित सभी राष्ट्र भारत की अगुवाई में एक साझा मंच पर वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था का 40% और आधी आबादी का प्रतिनिधित्व : वर्ष 2001 में एक आर्थिक अवधारणा (BRIC) के रूप में शुरू हुआ यह गठबंधन आज एक मजबूत रणनीतिक ब्लॉक बन चुका है। वर्तमान में 11 पूर्ण सदस्यों के साथ यह समूह विश्व की 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा 10 देशों (बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम) को ‘पार्टनर कंट्री’ ढांचे में शामिल कर ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रभाव को नई ऊंचाई दी गई है।
2026 की भारतीय अध्यक्षता में लिए गए प्रमुख रणनीतिक निर्णय:
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कृषि व डिजिटल तकनीक: प्राकृतिक व जैविक कृषि के लिए ‘ब्रिक्स उत्कृष्टता केंद्र’ (समन्वय: ICAR-IIFSR मोदीपुरम) और AI व IoT आधारित ‘डिजिटल कृषि नेटवर्क’ (समन्वय: IIT दिल्ली) स्थापित करने पर मुहर लगी है। इसके साथ ही बीज व जर्मप्लाज्म सहयोग के लिए ‘BRICS AGRIN’ नेटवर्क शुरू होगा।
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हेल्थकेयर और मानसिक स्वास्थ्य: गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए ब्रिक्स रोडमैप (2026-2029), पारंपरिक चिकित्सा (TCIM) टास्कफोर्स और मानसिक स्वास्थ्य के लिए NIMHANS के नेतृत्व में ‘ट्रेनिंग हब नेटवर्क’ का गठन किया गया है।
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स्टार्टअप्स व एमएसएमई सपोर्ट: उद्यमियों और छोटे उद्योगों के वित्तीय समाधान के लिए ‘ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल’ और शुरुआती दौर की कंपनियों को फंडिंग देने हेतु ‘ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड’ का ढांचा तैयार किया गया है।
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स्मार्ट एनर्जी व अर्बन मोबिलिटी: स्मार्ट ग्रिड व ऊर्जा भंडारण के लिए ‘डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और आपदा-रोधी शहरी नियोजन के लिए ‘ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब’ की शुरुआत की गई है।
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सप्लाई चेन और कस्टम्स एग्रीमेंट: क्रॉस-बॉर्डर सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने हेतु लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क, 2026-2030 ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान और सीमा शुल्क में परस्पर प्रशासनिक सहयोग समझौते को सैद्धांतिक सहमति दी गई है।
2012 से 2026: भारत का निरंतर संस्थागत नेतृत्व : भारत ने इससे पूर्व 2012 (नई दिल्ली), 2016 (गोवा) और 2021 (वर्चुअल) में ब्रिक्स का नेतृत्व किया था। 2012 में न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और कंटींजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) की नींव पड़ी, तो 2016 में नवीकरणीय ऊर्जा फंडिंग और आतंकवाद-रोधी समन्वय को रफ्तार मिली। 2026 की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 शहरों में 350 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित कर भारत ने न केवल बहुपक्षीय संस्थाओं में विकासशील देशों की आवाज को बुलंद किया, बल्कि व्यापार, तकनीक और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस संस्थागत परिणाम भी हासिल किए हैं।

