भारतीय रेल में निवेश की रफ्तार तेज : 11 साल में 942 मिलियन डॉलर एफडीआई, ₹26,000 करोड़ का निर्यात; वैश्विक साझेदारी से टेक्नोलॉजी अपग्रेड

नई दिल्ली : भारतीय रेल तेजी से आधुनिकीकरण की राह पर आगे बढ़ रही है। पिछले 11 वर्षों में रेलवे अवसंरचना क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के जरिए लगभग 942 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) प्राप्त हुआ है। सरकार की उदार निवेश नीति और 100% एफडीआई की अनुमति ने इस क्षेत्र को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है।

रेलवे क्षेत्र में निवेश का दायरा लगातार बढ़ा है, जिसमें हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं, समर्पित माल गलियारे, सिग्नलिंग सिस्टम, रेलवे विद्युतीकरण, यात्री और फ्रेट टर्मिनल जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल नेटवर्क विस्तार करना है, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित यात्रा अनुभव देना भी है।

बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला बल : सरकार ने रेलवे के पूंजी निवेश में भी बड़ा इजाफा किया है। वर्ष 2013-14 में जहां सकल बजटीय सहायता (GBS) करीब ₹29,000 करोड़ थी, वहीं 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर ₹2.78 लाख करोड़ कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी से रेलवे के आधुनिकीकरण, नई तकनीकों के उपयोग और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने में मदद मिली है।

वैश्विक सहयोग से तकनीकी मजबूती : भारतीय रेल ने तकनीकी उन्नयन के लिए कई देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है। स्विट्जरलैंड, जर्मनी, रूस और स्पेन जैसे देशों के साथ समझौते किए गए हैं, जिनके तहत हाई-स्पीड रेल, मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट, आईटी सॉल्यूशंस और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में काम हो रहा है। इससे भारतीय रेलवे को आधुनिक तकनीकों का लाभ मिल रहा है।

‘मेक इन इंडिया’ से बढ़ा निर्यात : रेलवे क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने से भारत अब वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। पिछले 9 वर्षों में रेलवे से जुड़े उत्पादों का निर्यात करीब ₹26,000 करोड़ (US$ 3.3 बिलियन) तक पहुंच गया है।

भारत में बने लोकोमोटिव, कोच, वैगन, मेट्रो कार और अन्य जरूरी उपकरण अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, स्पेन, इटली, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।

‘विकास से वैश्विक प्रतिस्पर्धा’ की ओर बढ़ता रेल सेक्टर : रेलवे में बढ़ता निवेश, तकनीकी सहयोग और निर्यात में तेजी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मजबूत नीतियों और निरंतर निवेश से भारतीय रेल भविष्य में और अधिक आधुनिक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

Share

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter