नई दिल्ली। पिछले एक दशक में भारत ने तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को केवल एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता बाजार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में एक उभरती हुई शक्ति के रूप में स्थापित किया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति और उभरती प्रौद्योगिकियों में बढ़ते निवेश ने भारत को नई पहचान दिलाई है।
सरकार द्वारा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और सुपरकंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में लगातार किए जा रहे निवेश ने देश में तकनीकी विकास को नई गति प्रदान की है। इन पहलों के चलते भारत न केवल अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद तकनीकी साझेदार के रूप में भी उभर रहा है।
डिजिटल इंडिया बना परिवर्तन का आधार : वर्ष 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में डिजिटल परिवर्तन की मजबूत नींव रखी। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल दूरी को काफी हद तक कम किया है। देश में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 25 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जबकि ब्रॉडबैंड सेवाओं का दायरा भी तेजी से विस्तारित हुआ है।
भारत ने दुनिया के सबसे तेज 5जी नेटवर्क विस्तार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्तमान में 5जी सेवाएं देश के लगभग सभी जिलों तक पहुंच चुकी हैं, जिससे डिजिटल सेवाओं और तकनीकी नवाचारों को नया आधार मिला है।
एआई, क्वांटम और सेमीकंडक्टर पर विशेष फोकस : भविष्य की तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से भारत एआई, सेमीकंडक्टर निर्माण, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में मिशन मोड में कार्य कर रहा है। अनुसंधान संस्थानों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर नई तकनीकों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में बढ़ता निवेश भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और उभरती तकनीकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिला सकता है।
सस्ती इंटरनेट सेवाओं ने बढ़ाया डिजिटल विस्तार : देश में इंटरनेट की उपलब्धता और कम लागत ने डिजिटल सेवाओं के उपयोग को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचाया है। डेटा की कीमतों में भारी कमी और बढ़ती कनेक्टिविटी के कारण ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, टेलीमेडिसिन, ई-कॉमर्स और ई-गवर्नेंस सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। इससे करोड़ों नागरिक सीधे डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।
विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम : तकनीकी क्षेत्र में हो रही यह प्रगति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डिजिटल गवर्नेंस, स्वदेशी तकनीकी विकास, नवाचार और वैश्विक सहयोग के बल पर भारत आने वाले वर्षों में विश्व की अग्रणी तकनीकी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीक आधारित विकास मॉडल भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा।

