जबलपुर/भोपाल। दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन के अवैध शिकार और उसके अंगों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी के कुख्यात आरोपी लालतन कुंगा को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की जबलपुर एकल पीठ ने अपराध की गंभीर प्रकृति और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को आधार मानते हुए आरोपी की दूसरी जमानत याचिका को भी सिरे से खारिज कर दिया। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) की जबलपुर इकाई द्वारा दर्ज इस संगीन मामले में आरोपी करीब 11 वर्षों तक लगातार फरार रहा था, जिसे लंबी मशक्कत के बाद 15 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
छिंदवाड़ा से खुला था अंतरराष्ट्रीय रैकेट, 19 तस्कर सलाखों के पीछे : यह पूरा मामला पश्चिम छिंदवाड़ा वनमंडल से उजागर हुआ था, जिसकी अंतर्राज्यीय कड़ियों को देखते हुए जांच एसटीएसएफ (STSF) की क्षेत्रीय इकाई जबलपुर को सौंपी गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह देश के जंगलों से दुर्लभ पैंगोलिन का शिकार कर उनके शल्कों (स्केल्स) और अवयवों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अवैध सप्लाई करता था। इस बड़े नेटवर्क में शामिल अब तक कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
मिजोरम का रहने वाला है आरोपी, एमपी और ओडिशा में दर्ज हैं केस : मूल रूप से मिजोरम निवासी लालतन कुंगा वन्यजीव तस्करी का आदतन अपराधी रहा है। उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत:
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मध्यप्रदेश में मामले: पैंगोलिन अंगों की तस्करी से जुड़े 3 अलग-अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
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ओडिशा में केस: ओडिशा राज्य में भी इसी तरह के वन्यजीव अपराध का 1 मामला दर्ज है।
अभियोजन ने दी पूर्व अपराधों की दलील, कोर्ट ने नहीं दी राहत : जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान राज्य शासन और एसटीएसएफ की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता ने अदालत में कड़ा विरोध दर्ज कराया। अभियोजन ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत समान प्रकृति के तीन पुराने आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह 11 साल तक कानून की गिरफ्त से भागता रहा है। यदि ऐसे संगठित तस्कर को रिहा किया गया, तो वह साक्ष्यों को प्रभावित कर दोबारा फरार हो सकता है। उच्च न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।

