नई दिल्ली : भारत का सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन सेक्टर तेज़ी से वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। सरकार की डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के कारण अब देश में डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए जोखिम कम हो रहा है और भरोसा बढ़ रहा है। इसी क्रम में बेंगलुरु स्थित C2I Semiconductors ने हाल ही में 15 मिलियन डॉलर की बड़ी फंडिंग जुटाकर भारतीय चिप इंडस्ट्री में नया रिकॉर्ड बना दिया है।
निवेशकों का भरोसा – भारतीय स्टार्टअप्स पर बड़ा दांव : इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया है। इससे पहले 2024 में कंपनी को Yali Capital से 4 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं। अब तक सी2आई में करीब 170 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। यह किसी भी भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप के लिए अब तक की सबसे बड़ी निजी फंडिंग में से एक मानी जा रही है।
क्या करती है C2I Semiconductors? : सी2आई ऊर्जा-कुशल और अत्यधिक भरोसेमंद पावर-मैनेजमेंट चिप्स डिज़ाइन कर रही है, जिनका इस्तेमाल बड़े एआई डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे सर्वरों को स्थिर और अधिक बिजली की जरूरत होती है। पारंपरिक सिस्टम इस दबाव को संभाल नहीं पाते — यहीं सी2आई की तकनीक गेम-चेंजर बन रही है।
ग्रिड से प्रोसेसर तक स्मार्ट पावर सप्लाई : कंपनी एक ऐसे इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है जो बिजली को ग्रिड से सीधे प्रोसेसर चिप तक बेहतर तरीके से नियंत्रित करता है। इससे ऊर्जा की बचत होती है, गर्मी कम पैदा होती है, सिस्टम की उम्र बढ़ती है और डेटा सेंटर ज्यादा भरोसेमंद बनते हैं।
सरकारी नीति से मिला मजबूत आधार : भारत सरकार की DLI योजना के तहत सी2आई को फाइनेंशियल सपोर्ट, हाई-एंड डिज़ाइन टूल्स और तकनीकी सहयोग मिला है। यही कारण है कि कंपनी बहुत कम समय में 65 से अधिक इंजीनियरों की टीम तैयार कर सकी और देश की टॉप चिप-डिज़ाइन कंपनियों में अपनी जगह बना पाई।
भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य की मजबूत नींव : निवेशकों का मानना है कि सी2आई जैसी कंपनियां भारत को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक चिप-डिज़ाइन लीडर बना सकती हैं। आने वाले महीनों में कंपनी की पहली सिलिकॉन चिप तैयार होने की उम्मीद है, जिससे भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को नई पहचान मिलेगी।


