दतिया। बुधवार को प्रशासन ने अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई कर दस बीघा शासकीय जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया था। जिस पर कब्जाधारी भांडेर निवासी एवं पूर्व बीएमओ डा.गनेशीलाल वर्मा का लगभग एक दशक से भी अधिक समय से कब्जा था। हैरानी की बात यह है कि 10 वर्ष तक सिंचाई विभाग ही अपनी इस जमीन को लेकर अनदेखी करता रहा।
स्थानीय निवासी रामप्रकाश गुप्ता ने इस जमीन को कब्जाधारी डा.वर्मा से मुक्त कराने के लिए सीएम हैल्प लाइन का सहारा लिया। गुप्ता का कहना है कि उन पर शिकायत वापिस लेने के लिए भी दबाब बनाया जा रहा था। वहीं शिकायतकर्ता का आरोप है कि 10 वर्ष तक बिना प्रशासन की मिलीभगत के कोई सरकारी जमीन पर काबिज नहीं रह सकता। गुप्ता ने मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की भी मांग की है।
दो वर्ष पूर्व की गई थी हैल्प लाइन पर शिकायत
जानकारी के अनुसार भांडेर-दतिया रोड पर बसवाह से पहले पारीछा नहर निकली है। यहां रामप्रकाश गुप्ता की जमीन भी है। उनकी जमीन के पीछे नहर से लगकर रिटायर्ड बीएमओ गनेशीलाल वर्मा की सात बिसे जमीन है। इसी जमीन से सटी 14 बीघा की सिंचाई विभाग की जमीन स्थित है। विभाग की उदासीनता और पटवारी की मिलीभगत के चलते वर्षों से डा.गनेशीलाल वर्मा इस जमीन को अपने निजी उपयोग में लेकर वहां कृषि एवं मत्स्य पालन कार्य कर रहे थे। रामप्रकाश गुप्ता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर अगस्त 2019 में इसकी शिकायत की। दो वर्ष बाद जब शिकायत के निराकरण को लेकर सख्ती हुई तब जाकर प्रशासन चेता और शिकायत एल.4 पर पहुंचने के बाद बुधवार को जमीन कब्जाधारी से मुक्त कराकर वहां निर्मित कोठी, गेंहूं की फसल को जेसीबी चलवाकर नष्ट किया गया।
चरनोई के इस्तेमाल में आती थी जमीन
जिस जमीन को प्रशासन ने कब्जामुक्त कराया है। वह कभी चरनोई की जमीन हुआ करती थी। इस जमीन को सिंचाई विभाग ने अपने विभागीय निर्माण के लिए प्रशासन से आबंटित कराई थी, लेकिन जिस योजना के लिए यह जमीन ली गई, वह ठंडे बस्ते में चली गई। कुछ समय बाद विभाग भी इस जमीन को भूल गया। इस लापरवाही का फायदा उठाते हुए डा.वर्मा ने इस जमीन पर न केवल कब्जा कर लिया, बल्कि निजी जमीन की तरह वहां तथाकथित फार्म हाउस भी विकसित कर लिया। साथ ही जमीन के नजदीक से निकली नहर से चोरी से पानी लेने की नीयत से नहर की दीवार से भी छेड़छाड़ कर उसे नुकसान पहुंचाया गया।
अतिक्रमण न दिखे इसलिए लगा दिए पेड़
किसी को इस अतिक्रमण की जानकारी न लगे, इसके लिए कब्जाधारी ने यहां नहर से सटकर पेड़ भी लगा दिए। सूत्रों बताते हैं कि डा. गनेशीलाल वर्मा ने पूर्व में लहार रोड अंजनी माता मंदिर रोड पर तथा बराना रोड खेड़ापति मंदिर के पास पड़ी खाली जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों ने तब उनके मंसूबे विफल कर दिए थे।
इस मामले में शिकायतकर्ता रामप्रकाश गुप्ता का कहना है कि जमीन को कब्जामुक्त कराने की गई 181 पर दर्ज शिकायत वापिस लेने के लिए मुझ पर प्रशासनिक दबाव डाला गया। लेकिन मैंने शिकायत वापिस नहीं ली। यदि प्रशासन की नीयत साफ होती तो शिकायत के शुरुआती चरण में ही यह कार्रवाही होनी चाहिए थी। एल-4 चरण तक का क्यों इंतजार किया गया। प्रशासनिक मिलीभगत के सरकारी जमीन पर कोई कैसे इतने लंबे समय तक काबिज रह सकता है। इस मामले में दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर भी कार्रवाही होनी चाहिए।

