कोबा तीर्थ से दुनिया तक गूंजा जैन दर्शन: महावीर जयंती पर सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का भव्य उद्घाटन, PM मोदी बोले—यह केवल संग्रहालय नहीं, भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत प्रतीक
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गांधीनगर/नई दिल्ली : महावीर जयंती के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में सम्राट सम्प्रति संग्रहालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान महावीर को नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह संग्रहालय जैन संस्कृति की गहराई और मानवता के शाश्वत मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करेगा।

आध्यात्म और ज्ञान का संगम बना कोबा तीर्थ : प्रधानमंत्री ने कहा कि कोबा तीर्थ सदियों से साधना, सेवा और आत्मानुशासन का केंद्र रहा है। यहां की परंपराएं भारतीय संस्कृति की उस धारा को दर्शाती हैं, जिसमें ज्ञान और संस्कारों का निरंतर प्रवाह बना रहता है। उन्होंने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर स्थल बताते हुए कहा कि ऐसे केंद्र समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।

सम्राट सम्प्रति: सत्ता से सेवा का संदेश : अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सम्राट सम्प्रति के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने शासन को सेवा और साधना का माध्यम बनाया। उनके द्वारा अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह जैसे मूल्यों का प्रचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह संग्रहालय उन्हीं आदर्शों को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करता है।

नई पीढ़ी को जोड़ने का आधुनिक प्रयास : संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं में जैन धर्म, तीर्थंकरों की शिक्षाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसके माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिससे वे परंपरा और विज्ञान दोनों को समझ सकें।

विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण : प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संग्रहालय केवल जैन धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत की अन्य परंपराओं—वैदिक, बौद्ध और योग—का भी समावेश किया गया है। यह देश की “विविधता में एकता” की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।

धरोहर संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम : उन्होंने बताया कि सरकार प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “ज्ञान भारतम् मिशन” जैसे प्रयासों के माध्यम से भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सम्राट सम्प्रति संग्रहालय आने वाले समय में शोध, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रमुख केंद्र बनेगा और भारत की गौरवशाली परंपरा को विश्वभर में नई पहचान दिलाएगा।

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