सनकुआं पर प्रारंभ हुआ कार्तिक स्नान, समीपस्थ क्षेत्रों से पहुंच रही महिला श्रद्धालु
दतिया. कार्तिक स्नान का विशेष महत्व होता है। ब्रहम् महूर्त में महिलाओं द्वारा जलाशयों पर जाकर यह स्नान किए जाते हैं। सनकुआं एक पावन तीर्थ है। यहां स्नान अनंत गुना फलदाई होता है। यह परम्परा द्वापर युग से लगातार चली आ रही है। पं. पद्मनारायण दुबोलिया ने यह विचार सनकुआं धाम पर आयोजित कार्तिक स्नान के दौरान व्यक्त किए।शरद पूर्णिमा से नगर में स्थित पावन तीर्थ सनकुआं पर कार्तिक स्नान प्रारंभ हो गया है। सेवढ़ा नगर के अलावा आसपास के ग्रामीण एवं कस्बाई इलाकों से महिलाएं आकर सनकुआं पर पर्व स्नान के लिए पहुंचती है। कार्तिक स्नान सुबह 4 बजे से प्रारंभ हो जाता है। स्नान के बाद पूजा अर्चना का दौर चलता है। घाट पर मौजूद पंडितों द्वारा महिलाओं को कथा सुनाई जाती है। बुधवार को विद्वान पंडित पद्मनारायण दुबोलिया ने कार्तिक स्नान के महत्व को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह स्नान विचारों की पवित्रता के साथ लोगों के जीवन में प्रभु की कृपा बरसाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्तिक स्नान करने के लिए सबसे पहले संकल्प करना होता है। महाभारत में संकल्प विधि को बताया गया है। इसके अनुसार दाहिने हाथ में तांबे का जलपात्र लेकर उत्तर दिशा की तरफ मुंह कर संकल्प लिया जाता है। यदि तांबे का पात्र नहीं है तो उत्तर की तरफ मुंह कर संकल्प ले सकते है।

उपवास का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि उपवास यानि भगवान के पास निवास करना भगवान के पास बैठना। उपवास के दौरान सात्विक भोजन लिया जााता है। यह भोजन आहार विहार बदलता है। ब्रत के साथ कथा प्रसंग और सत्संग का विधान है। जैसा हम श्रवण करते है वैसा ही ज्ञान प्राप्त होता है। व्रत के दौरान साधना करना भी जरूरी। भगवान को मंदिरों तक सीमित कर दिया गया है। जबकि हमें अपने कर्म स्थल एवं शयन कक्ष में भी भगवान की तस्वीर रखनी चाहिए। उनके दर्शन से ईश्वर के गुणधर्म खुद में प्रकट हो जाएंगे। उपवास के दौरान मंूग, जबा, तिल, नागर मोथा, समारी, बधुआ, कंदमूल सेंधा नमक गाय का दूध, दही घी आदि का सेवन कर सकतेे है। उपवास में बिल्कुल न खाना या अधिक खाना दोनों ही वर्जित हैं। एक माह में हमारी साधना काफी ऊपर पहुंच सकती है। मन बुद्धि सभी शुद्ध होकर प्रभु के आशीष के करीब पहुंच जाते है।

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