लखपति दीदी पहल से बदली तस्वीर : मध्यप्रदेश में महिलाओं को मिला आर्थिक सशक्तिकरण का नया आधार

भोपाल : मध्यप्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में “लखपति दीदी” पहल तेजी से प्रभावी होती नजर आ रही है। राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की वार्षिक आय को कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाना है। यही कारण है कि यह पहल अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ महिलाओं के जीवन स्तर में भी बड़ा बदलाव ला रही है।

सरकार ने अगले दो वर्षों में 16.41 लाख परिवारों को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें अब तक 12.49 लाख महिलाएं इस श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। यह आंकड़ा योजना की सफलता और जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। योजना को मजबूत बनाने के लिए 526 मास्टर ट्रेनर और 20 हजार से अधिक कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) तैयार किए गए हैं, जो महिलाओं को प्रशिक्षण देने के साथ उनकी आय बढ़ाने की रणनीति भी तैयार कर रहे हैं।

कृषि से बढ़ रही आमदनी के नए रास्ते
इस पहल के तहत महिलाओं को सब्जी उत्पादन, मसाला खेती और फलदार पौधारोपण जैसे कार्यों से जोड़ा जा रहा है। आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई, पॉलीहाउस और जैविक खेती को अपनाकर महिलाएं कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर रही हैं। “ड्रोन दीदी” जैसी पहलें भी महिलाओं को नई तकनीकी भूमिका में लाकर अतिरिक्त आय का माध्यम बना रही हैं।

गैर-कृषि क्षेत्र में भी बढ़ रहा दायरा
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए स्टार्टअप और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इन उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे महिलाओं की पहुंच स्थानीय से राष्ट्रीय बाजार तक बन रही है।

स्व-सहायता समूह बने मजबूती का आधार
प्रदेश में करीब 5 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 59 लाख परिवार आज आर्थिक गतिविधियों में शामिल हैं। ये समूह न केवल महिलाओं को आय के साधन उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ा रहे हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम
“लखपति दीदी” पहल सिर्फ आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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