भोपाल। मध्यप्रदेश जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से राज्य में जल आत्मनिर्भरता की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के अंतर्गत अब तक 1 लाख 77 हजार से अधिक जल संरक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन मजबूत करने में मदद मिल रही है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के समन्वय से संचालित इस अभियान के तहत प्रदेश में कुल 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन कार्यों के लिए 6 हजार 201 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है, जबकि अब तक 4 हजार 443 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन करते हुए “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में” रोकने की अवधारणा को साकार करना है।
अभियान के अंतर्गत डग वेल रिचार्ज यानी सूखे कुओं के पुनर्भरण में उल्लेखनीय सफलता मिली है। प्रदेश में अब तक 88 हजार से अधिक कुओं का रिचार्ज कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं किसानों को सिंचाई और पशुपालन में सहायता देने के उद्देश्य से 53 हजार 568 खेत तालाबों का निर्माण भी कराया गया है। इसके अलावा जल संरक्षण और पुनर्भरण से जुड़े हजारों अन्य कार्य भी तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।
सरकार द्वारा अभियान की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वृक्षारोपण, स्कूलों में जल टैंकों की सफाई और जल जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को भी इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे जनभागीदारी का परिणाम बताते हुए कहा कि जल संरक्षण समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।

