भोपाल। मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि कृषि क्षेत्र में किए गए योजनाबद्ध प्रयासों और नीतिगत फैसलों का परिणाम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। दलहन उत्पादन में राज्य देश में पहले स्थान पर है, जबकि तिलहन उत्पादन में दूसरा स्थान हासिल किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को और सशक्त करना है।
कुल खाद्यान्न उत्पादन में दूसरा स्थान : आंकड़ों के अनुसार गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20.78 प्रतिशत है। इस आधार पर राज्य गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर रहा।
मक्का उत्पादन में भी राज्य ने 6.64 मिलियन टन का उत्पादन किया और राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान दर्ज किया। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में 7.78 मिलियन टन उत्पादन के साथ राज्य ने लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की और देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
दलहन उत्पादन में बरकरार शीर्ष स्थान : दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। कुल 5.24 मिलियन टन उत्पादन के साथ राज्य ने 20.40 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की और देश में पहला स्थान प्राप्त किया।
चना उत्पादन में 2.11 मिलियन टन उत्पादन के साथ राज्य लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरे स्थान पर रहा।
तिलहन फसलों में भी मजबूत पकड़ : तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 19.19 प्रतिशत है। इस प्रदर्शन के साथ राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा।
सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है। मूंगफली उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा, जो देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत है, और इस श्रेणी में राज्य तीसरे स्थान पर है।
योजनाओं के प्रभाव से बढ़ा उत्पादन : सरकार के अनुसार केंद्र और राज्य स्तर पर संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं का प्रभाव उत्पादन वृद्धि में दिखाई दिया है। इनमें रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, फसल विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और भावांतर भुगतान योजना शामिल हैं।
इन पहलों के परिणामस्वरूप राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़े संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश देश की कृषि व्यवस्था में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरा है।


