नई दिल्ली/भोपाल। राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उपलक्ष्य में सजे ‘ब्रिक्स बाजार’ में मध्यप्रदेश के धार जिले की पारंपरिक बाग प्रिंट कला वैश्विक पटल पर विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पूरी तरह प्राकृतिक रंगों और सागौन की लकड़ी पर उकेरे गए बारीक नक्काशीदार ठप्पों (ब्लॉक्स) से तैयार होने वाली इस सदियों पुरानी शिल्प कला का विदेशी प्रतिनिधियों के सामने जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। सम्मेलन में पहुंचे 11 सदस्य देशों और भागीदार राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सूती व रेशमी कपड़ों पर की जाने वाली इस जटिल छपाई और उसकी पारंपरिक रंग-निर्माण तकनीक से रूबरू कराया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है।
राजनयिकों ने अपने हाथों से लगाए ठप्पे, स्मृति-चिह्न के रूप में संजोया : शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए विभिन्न देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने ब्रिक्स बाजार का भ्रमण कर बाग प्रिंट के स्टॉल पर विशेष रुचि दिखाई। प्रतिनिधियों ने न केवल कारीगरों से छपाई की वैज्ञानिक व प्राकृतिक प्रक्रिया समझी, बल्कि खुद प्राकृतिक रंगों में लकड़ी के ब्लॉक्स डुबोकर कपड़े पर छपाई का अनुभव लिया। इस अवसर के लिए विशेष रूप से ‘BRICS’ प्रतीक चिन्ह (लोगो) वाले हस्तनिर्मित ब्लॉक्स तैयार किए गए थे। विदेशी प्रतिनिधियों ने इन विशेष ठप्पों से खुद कपड़े पर प्रिंट तैयार किए और उन्हें इस ऐतिहासिक सम्मेलन के अनूठे स्मृति-चिह्न के रूप में अपने साथ सुरक्षित रख लिया।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मोहम्मद बिलाल खत्री कर रहे हैं जीवंत प्रदर्शन : भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित धार जिले के प्रख्यात शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर बाग प्रिंट का सजीव प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह कला विशुद्ध रूप से पर्यावरण-अनुकूल है, जिसमें फिटकरी, हरदा, लोहे के जंग का पानी और अनार के छिलकों जैसे प्राकृतिक घटकों से रंग तैयार किए जाते हैं। वैश्विक मंच पर विदेशी प्रतिनिधियों का इस कला की बारीकियों से जुड़ना राज्य की पारंपरिक शिल्प विधाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
11 देशों के शिल्पकारों के बीच मध्यप्रदेश की मजबूत मौजूदगी : ब्रिक्स बाजार में भारत के अलावा ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, यूएई, सऊदी अरब, इथियोपिया और हाल ही में जुड़े इंडोनेशिया के साथ-साथ वियतनाम, मलेशिया, कजाकिस्तान व बेलारूस जैसे भागीदार देशों के प्रसिद्ध हस्तशिल्प भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इन वैश्विक स्टॉलों के बीच धार के बाग प्रिंट को मिल रही सराहना ने भारतीय पारंपरिक वस्त्र उद्योग और ग्रामीण कारीगरों की दक्षता को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया है।

