एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले : प्रदेश के विकास व इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹41 हजार करोड़ मंजूर, आरजीपीवी का पुनर्गठन कर 3 नए तकनीकी विश्वविद्यालय बनेंगे

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जनहित से जुड़े 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने ग्रामीण आजीविका, उच्च तकनीकी शिक्षा, सड़क कनेक्टिविटी, दुग्ध उत्पादन और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगाई।

‘वीबी जी राम जी योजना’: अब मिलेगा 125 दिन का कानूनी रोजगार : ग्रामीण विकास को गति देने के लिए ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी जी राम जी योजना’ के 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष अब 100 के स्थान पर 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। योजना के तहत जीआईएस और पीएम गति शक्ति के माध्यम से ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार होगी। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति और हर जिले में डिजिटल लोकपाल की तैनाती की जाएगी।

आरजीपीवी का पुनर्गठन: भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में 3 नए तकनीकी विश्वविद्यालय : तकनीकी शिक्षा के विस्तार और क्षेत्रीय संतुलन के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का पुनर्गठन करने का निर्णय लिया गया है। अब प्रदेश में तीन स्वतंत्र तकनीकी विश्वविद्यालय काम करेंगे:

  • मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय (भोपाल): इसके अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग आएंगे।

  • मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय (उज्जैन): इसमें उज्जैन और इंदौर संभाग शामिल होंगे।

  • महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय (जबलपुर): इसके क्षेत्राधिकार में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग रहेंगे।

सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर: पश्चिम भोपाल बायपास व बीना कॉरिडोर को मंजूरी

  • पश्चिम भोपाल बायपास (4-लेन) : 35.61 किमी लंबे इस बायपास के लिए ₹3,774 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इससे जबलपुर व नर्मदापुरम से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर के अंदर नहीं आना पड़ेगा और करीब 21 किमी की दूरी घटेगी।

  • मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग : 67.11 किमी लंबे 4-लेन मार्ग के लिए ₹3,272 करोड़ मंजूर किए गए हैं। यह मार्ग बीना रिफाइनरी, पावर प्लांट और एनएच-44 को जोड़कर सशक्त औद्योगिक व लॉजिस्टिक कॉरिडोर बनेगा।

‘सांची’ ब्रांड का कायाकल्प: ₹2,973 करोड़ की डेयरी योजना : दुग्ध उत्पादकों के हित में एनडीडीबी के सहयोग से ₹2,973 करोड़ की वृहद डेयरी विकास योजना स्वीकृत की गई है। इसके तहत अगले 5 वर्षों में दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक किया जाएगा और दुग्ध संकलन क्षमता को 12 लाख किग्रा से बढ़ाकर 52 लाख किग्रा प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वास्थ्य, किसान कल्याण व नए जिलों को सौगात

  • स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण: अस्पतालों में मशीनों व उपकरणों के रखरखाव के लिए ₹488 करोड़ तथा मॉड्यूलर ओटी व परिसंपत्तियों के संधारण के लिए ₹916 करोड़ मंजूर किए गए।

  • मूंग उपार्जन सीमा में बढ़ोतरी: पंजीकृत किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के पूर्व निर्णय का अनुसमर्थन किया गया।

  • नवगठित जिलों में नए पद: मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी में प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय विभाग में 21 और आयुष विभाग में 20 नए पदों के सृजन को हरी झंडी दी गई।

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