नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय संविधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से विचार-विमर्श के उपरांत 14 न्यायिक अधिकारियों को विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश एवं अपर न्यायाधीश (Additional Judge) के पद पर नियुक्त किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नियुक्तियां दिल्ली, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में की गई हैं।
उच्च न्यायालयवार नियुक्तियों का विवरण:
| उच्च न्यायालय | पद | नियुक्त न्यायिक अधिकारी |
| दिल्ली उच्च न्यायालय | न्यायाधीश (स्थायी) | निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना |
| दिल्ली उच्च न्यायालय | अपर न्यायाधीश | संजय शर्मा, भरत पराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट, अरुण भारद्वाज |
| जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय | न्यायाधीश (स्थायी) | यश पॉल बॉर्नी |
| झारखंड उच्च न्यायालय | न्यायाधीश (स्थायी) | मनोज प्रसाद, अखिल कुमार, राम शर्मा |
| कर्नाटक उच्च न्यायालय | अपर न्यायाधीश | उषारानी, के. एस. भरत कुमार, नेराले वी. भवानी |
दिल्ली हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा 7 नई नियुक्तियां : राजधानी के दिल्ली उच्च न्यायालय को कुल 7 नए जज मिले हैं। इनमें दो महिला न्यायिक अधिकारियों— निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना को सीधे स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि पांच अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अपर न्यायाधीश का दायित्व सौंपा गया है।
लंबित मामलों के निपटारे को मिलेगी गति : जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में यश पॉल बॉर्नी, झारखंड हाईकोर्ट में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार व राम शर्मा को स्थायी जज बनाया गया है। वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट में उषारानी, के. एस. भरत कुमार और नेराले वी. भवानी को अपर न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
इन नियुक्तियों से संबंधित उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों की संख्या कम होगी और अपीलीय तथा आपराधिक व दीवानी मामलों की पेंडेंसी में कमी लाकर त्वरित न्याय व्यवस्था को गति मिलेगी।

