चुनाव के बाद हिंसा के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता HC के फैसले को दी चुनौती
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कोलकाता : बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के पांच जजों की पीठ द्वारा सीबीआइ से जांच कराने व विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित कर पड़ताल करने के आदेश देने के खिलाफ ममता सरकार आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।

सूत्रों के मुताबिक बुधवार को ममता सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। अपनी याचिका में ममता सरकार ने कहा है कि उसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है, क्योंकि सीबीआइ केंद्र के इशारे पर काम कर रही है।

सीबीआइ तृणमूल कांग्रेस के पदाधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज करने में व्यस्त है। याचिका में दो सिंतबर को मामले की सुनवाई करने का आग्रह किया गया है। गौरतलब है कि गत 18 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के दौरान हत्या और दुष्कर्म के मामलों की सीबीआइ से जांच कराने का आदेश दिया था।

इसके अलावा अन्य अपराधों की जांच के लिए एसआइटी गठित करने को कहा था। कोर्ट ने सीबीआइ को छह सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। हिंसा के मामलों की जांच के लिए तीन जिलों में पहुंची सीबीआइ दूसरी तरफ, चुनाव बाद हिंसा के मामलों की जांच के लिए सीबीआइ की टीम बुधवार को राज्य के तीन जिलों में पहुंची तथा पीड़ितों व उनके स्वजन से बातचीत की।

सीबीआइ के अधिकारियों ने नदिया जिले के चाकदह में भाजपा कार्यकर्ता दिलीप कीर्तनिया की शव बरामदगी के मामले में उनके स्वजन से बातचीत की तथा घटनास्थल का दौरा किया। इसके साथ ही टीम पूर्व मेदिनीपुर के खेजुरी में पहुंची, जहां 60 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में आरोप तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगा था।

इस मामले में टीम ने स्थानीय लोगों से भी बातचीत कर जानकारी इकट्ठा की। इसके अलावा सीबीआइ के अधिकारी बीरभूम जिले के सिउड़ी में पहुंचे, जहां चुनाव बाद हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता मिथुन बागदी की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। यहां भी हत्या का आरोप तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लगा था। अधिकारियों ने उनके स्वजन से बातचीत की।

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