विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा : एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली जमानत ; एफडी हेराफेरी मामले में दोषी करार, गुरुवार को आया फैसला !

दतिया/नई दिल्ली : कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े  एफडी हेराफेरी मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। लंबे समय से विचाराधीन इस प्रकरण में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई। हालांकि, निर्णय के तुरंत बाद ही अदालत ने उन्हें जमानत दे दी, जिससे उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है।

करीब 27 वर्ष पुराने इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित हुए हैं, जिसके आधार पर उन्हें सजा दी गई है। इस मामले में बैंक कर्मचारी रघुवीर प्रजापति को भी सह-आरोपी के रूप में दोषी करार दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और उनकी विधायकी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

अदालत ने राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 120B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जालसाजी व दस्तावेजों के दुरुपयोग) के तहत दोषी पाया। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी कोर्ट ने दोषी माना है। सजा के तहत दो धाराओं में तीन-तीन साल और एक धारा में दो साल का कारावास निर्धारित किया गया है।


कई धाराओं में सजा, विधायकी पर खतरा : कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा में अलग-अलग धाराओं के तहत तीन-तीन साल और एक धारा में दो साल की सजा शामिल है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस सजा के बाद विधायक की सदस्यता पर संकट उत्पन्न हो गया है। हालांकि, नियमानुसार उन्हें उच्च न्यायालय में अपील के लिए 60 दिनों का समय मिलेगा। यदि उच्च न्यायालय से सजा पर स्थगन मिल जाता है, तो उनकी विधायकी बची रह सकती है।


क्या था पूरा मामला? : यह पूरा प्रकरण जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से जुड़े एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) विवाद से संबंधित है। आरोप था कि एफडी की अवधि में कथित रूप से बदलाव कर अतिरिक्त लाभ प्राप्त किया गया। इस संबंध में बैंक के एक कर्मचारी द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामला कानूनी रूप लेता हुआ अदालत तक पहुंचा।

अभियोजन पक्ष का दावा था कि एफडी की मूल अवधि में हेरफेर कर उसे अधिक समय तक दर्शाया गया, जिससे ब्याज के रूप में अनुचित लाभ लिया गया। वहीं, बचाव पक्ष लगातार इन आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताता रहा।


ग्वालियर से दिल्ली पहुंचा मामला : इस केस की एक अहम कड़ी यह भी रही कि सुनवाई के दौरान स्थानांतरण को लेकर विवाद सामने आया। स्वयं विधायक द्वारा निष्पक्ष सुनवाई की मांग करते हुए मामला ग्वालियर से अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की याचिका दायर की गई थी। इसके बाद उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर यह मामला दिल्ली की विशेष अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां अंतिम सुनवाई पूरी हुई।


राजनीतिक हलचल तेज : अदालत के इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर इस फैसले के राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट में दायर की जाने वाली अपील और उसके निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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