दतिया। नगर पालिका परिषद दतिया के कर्मचारी आत्महत्या प्रकरण में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। विशेष न्यायालय ने तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) नागेन्द्र सिंह गुर्जर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इंकार किया।
आत्महत्या के बाद दर्ज हुआ था मामला : जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद दतिया में कार्यरत लिपिक दिलीप सिंह का शव फरवरी 2026 में उनके निवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। घटना के बाद परिजनों ने कार्यस्थल पर उत्पन्न परिस्थितियों और कथित मानसिक दबाव को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
पत्नी ने कार्यालयी दबाव को बताया था कारण : मृतक की पत्नी माधुरी सिंह ने शिकायत में आरोप लगाया था कि कार्यालय में कुछ कर्मचारियों द्वारा उनके पति पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता था। शिकायत में राजेश दुबे और धर्मेन्द्र शर्मा के नाम भी सामने आए थे। परिजनों का कहना था कि कार्यस्थल पर हुए घटनाक्रमों के चलते दिलीप सिंह लगातार मानसिक तनाव में थे।
कार्य में बदलाव को लेकर भी उठे थे सवाल : शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि तत्कालीन सीएमओ नागेन्द्र सिंह गुर्जर द्वारा दिलीप सिंह के दायित्वों में बदलाव किए जाने के बाद उनकी परेशानी और बढ़ गई थी। परिजनों का दावा था कि इसके बाद उनका व्यवहार बदला हुआ दिखाई देता था और वे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे।
अदालत में हुआ दोनों पक्षों का पक्ष प्रस्तुत : अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मृतक की पत्नी माधुरी सिंह ने लिखित आपत्ति प्रस्तुत करते हुए अदालत से याचिका निरस्त करने की मांग की। वहीं बचाव पक्ष ने अग्रिम जमानत देने का आग्रह किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया।
प्रथम दृष्टया सामग्री मिलने पर राहत से इनकार : न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जांच अभिलेखों में प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य मौजूद हैं, जिनके आधार पर मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी कारण अग्रिम जमानत प्रदान करना उचित नहीं पाया गया और याचिका निरस्त कर दी गई।
जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर : अदालत के फैसले के बाद मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

