पंचायत विकास योजनाओं पर राष्ट्रीय मंथन : दो दिवसीय कार्यशाला, डेटा आधारित योजना पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली : ग्रामीण विकास को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 4 और 5 मई 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में पंचायत विकास योजनाओं (2026-27) की तैयारी को लेकर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम स्तर पर योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक, सहभागी और डेटा-आधारित बनाना है, ताकि विकास योजनाएं जमीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में विवेक भारद्वाज (सचिव, पंचायती राज मंत्रालय) और अशोक के.के. मीना (सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय) मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे और पंचायत सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा करेंगे। इस दौरान पंचायत विकास योजना (2026-27) के लिए जन योजना अभियान (PPC) पुस्तिका, गुणवत्तापूर्ण GPDP गाइडलाइन और नए स्वरूप में विकसित e-GramSwaraj Portal का भी शुभारंभ किया जाएगा।

ग्राम स्तर पर योजनाओं को मिलेगा नया ढांचा : इस कार्यशाला में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और पंचायती राज से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे। तकनीकी सत्रों और समूह अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों के लिए बेहतर और प्रभावी पंचायत विकास योजनाएं तैयार कर सकें।

विशेष रूप से आजीविका, स्वास्थ्य, बाल कल्याण, जल प्रबंधन, स्वच्छता, बुनियादी ढांचा, सामाजिक न्याय, सुशासन और महिला सशक्तिकरण जैसे दस प्रमुख विषयों पर योजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही PESA और वन अधिकार कानून के अनुपालन पर भी फोकस रहेगा, ताकि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।

16वें वित्त आयोग के अनुरूप होगी योजना : इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि पंचायत विकास योजनाएं 16वां वित्त आयोग की शर्तों और दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार हों। इससे न केवल वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि योजनाओं के परिणाम भी स्पष्ट और मापने योग्य होंगे।

कुल मिलाकर, यह कार्यशाला ‘विकसित पंचायत, विकसित भारत’ की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इससे ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने, स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार करने और ग्रामीण भारत के समग्र विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

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