नई दिल्ली | देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने और सहकारी ढांचे को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार एक अहम पहल करने जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न को ज़मीन पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिसमें सहकारी संस्थाओं को केवल संगठन नहीं, बल्कि ग्रामीण आय और आत्मनिर्भरता के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित करने की रणनीति पर चर्चा होगी।
सहकारिता के भविष्य की बनेगी साझा रूपरेखा : इस मंथन बैठक में देशभर के सहकारिता मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य अब तक किए गए सुधारों की समीक्षा, राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान और एक साझा भविष्य कार्ययोजना तैयार करना है ताकि सहकारी आंदोलन को नई गति मिल सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत : बैठक में दो लाख से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही किसानों को भंडारण और बाज़ार सुविधा देने के लिए देशव्यापी आधुनिक गोदाम नेटवर्क के विस्तार पर भी विचार किया जाएगा।
निर्यात, बीज और ऑर्गेनिक खेती पर फोकस : राष्ट्रीय स्तर पर गठित नई सहकारी संस्थाओं — NCEL, NCOL और BBSSL — में राज्यों की भूमिका और भागीदारी पर चर्चा होगी। इन संस्थाओं के ज़रिये निर्यात, जैविक उत्पादों और गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति को बढ़ावा देने की योजना पर रणनीति बनेगी।
कानूनी सुधार और डिजिटल मजबूती : राज्यों के सहकारिता कानूनों में सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी बैंकों को मजबूत करने, PACS और रजिस्ट्रार कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण तथा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के उपयोग पर भी गहन चर्चा की जाएगी।


