नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें पंजाब के थर्मल पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन में आई गिरावट का कारण केंद्र से कोयले की अपर्याप्त आपूर्ति बताया गया था। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि पंजाब के सभी विद्युत संयंत्रों को पर्याप्त मात्रा में कोयला मुहैया कराया गया है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) राज्य में बिजली उत्पादन के लिए निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मानक जरूरत का 117% स्टॉक, फिर भी 42% रहा पीएलएफ : मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) कुल 2,300 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाले तीन थर्मल पावर प्लांटों—गुरु हरगोविंद थर्मल पावर प्लांट (लेहरा मोहब्बत), गोइंदवाल साहिब और रोपड़ थर्मल पावर प्लांट का संचालन करता है।
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सरप्लस भंडार : 4 सितंबर 2026 तक पीएसपीसीएल के संयंत्रों में कोयले का कुल स्टॉक मानक आवश्यकता का लगभग 117 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जरूरत से काफी अधिक है।
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कम उत्पादन की वजह कोयला नहीं : भारी स्टॉक के बावजूद अगस्त 2026 में पीएसपीसीएल के प्लांट्स का औसत प्लांट लोड फैक्टर (PLF) मात्र 42 प्रतिशत रहा।
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निजी संयंत्रों का बेहतर प्रदर्शन : इसके विपरीत, पंजाब स्थित स्वतंत्र बिजली उत्पादक (IPP) नाभा पावर लिमिटेड (NPL) ने सीआईएल से मिले कोयले के बल पर इसी अवधि में करीब 93 प्रतिशत पीएलएफ हासिल किया। यह स्पष्ट करता है कि राज्य में उत्पादन घटने की वजह कोयले की अनुपलब्धता नहीं है।
कैप्टिव खदानों और स्वतंत्र संयंत्रों को दी गई विशेष छूट : केंद्र सरकार ने पंजाब में कैप्टिव खदानों से उत्पादन शुरू होने के बाद से ही स्वतंत्र संयंत्रों (IPPs) को कोयले की आवाजाही को लगातार सुगम बनाया है। पीएसपीसीएल की कैप्टिव ‘पचवारा सेंट्रल कोल माइन’ से नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (मानसा) जैसे गैर-स्वामित्व वाले आईपीपी को उनकी जरूरतें पूरी करने के बाद वार्षिक उत्पादन का 50 प्रतिशत तक कोयला उपयोग करने की पहले ही अनुमति दी जा चुकी है।
ऑफर के बावजूद कोयला उठाने में हो रही देरी : कोयला मंत्रालय ने रेखांकित किया कि कोल इंडिया की सहायक कंपनियों द्वारा लगातार कोयले की पेशकश की जा रही है, लेकिन निजी संयंत्रों द्वारा समय पर बुकिंग और उठान (लिफ्टिंग) नहीं किया जा रहा है:
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सीसीएल (CCL) : 30 मार्च 2026 को एनपीएल और टीएसपीएल को 5 लाख टन कोयले की पेशकश की गई थी, जिसके एवज में केवल 4.1 लाख टन की बुकिंग हुई और अब तक लगभग 3.1 लाख टन कोयला ही उठाया गया।
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बीसीसीएल (BCCL) : एनपीएल को 3.5 लाख टन कोयले का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन केवल 1.3 लाख टन बुक हुआ और महज 0.98 लाख टन कोयले का ही उठान किया गया।
मंत्रालय ने कहा है कि पंजाब में बिजली आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए आवश्यक है कि पीएसपीसीएल अपने स्वयं के संयंत्रों की परिचालन क्षमता (पीएलएफ) में सुधार करे और आवंटित कोयले की समय पर ढुलाई सुनिश्चित की जाए।

