वाशिंगटन : अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों की निंदा की और कहा कि प्योंगयांग की तकनीकी प्रगति उसके परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रमों तथा उसकी आर्थिक गतिविधियों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को तत्काल लागू करने की आवश्यकता है। अमेरिकी राजदूत ग्रीनफील्ड ने उत्तर कोरिया से उकसावों को रोकने की अपील की, जो सुरक्षा परिषद प्रतिबंध प्रस्तावों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहाकि प्योंगयांग को बिना किसी पूर्व शर्त, कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडन के प्रशासन के साथ बातचीत शुरु करनी चाहिए।
उन्होंने सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के पूर्ण क्रियान्वयन की अपील भी की। ताकि हम डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) की कोष, प्रौद्योगिकी तक पहुंच रोक पाएं। जिसकी उसे व्यापक विनाश के लिए गैरकानूनी हथियार बनाने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए जरूरत है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों पर बुलाई गई आपात बैठक से पहले ग्रीनफील्ड ने मीडिया से कहा था कि अमेरिका ने उत्तर कोरिया के अधिकारियों को वार्ता का प्रस्ताव दिया है।
सुरक्षा परिषद में यूरोपीय संघ के तीन सदस्य, आयरलैंड, फ्रांस और एस्टोनिया ने एक अलग बयान में कहा कि पनडुब्बी से दागे जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण की खबरें डीपीआरके के हालिया उकसावे का ही हिस्सा है। जिसमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के परीक्षण शामिल हैं। जिसमें से वह एक हाइपरसोनिक ग्लाइडर होने का दावा करता है।
उन्होंने कहा कि पनडुब्बी से मिसाइल का परीक्षण परमाणु तथा बैलिस्टिक कार्यक्रम की निरंतर वृद्धि को रेखांकित करता है, जो उसकी समुद्र-आधारित परमाणु क्षमताओं को हासिल करने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
आयरलैंड, फ्रांस और एस्टोनिया ने भी उत्तर कोरिया से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के वार्ता के प्रस्ताव पर सकारात्मकता के साथ जवाब देने की अपील की और कहाकि कोरियाई द्वीप में शांति, सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के 15 सदस्यीय निकाय सुरक्षा परिषद ने सहायक महासचिव मोहम्मद खालिद खियारी के नेतृत्व में उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों पर एक बैठक की, लेकिन कोई बयान नहीं जारी किया गया है।


