ग्वालियर | वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुण श्रीवास्तव के निधन के बाद उनका देहदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान देने वाले डॉ. श्रीवास्तव ने जीवन के बाद भी मानवता की सेवा का मार्ग चुना। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनकी पार्थिव देह ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज को दान की गई, ताकि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में उसका उपयोग हो सके।
प्रदेश सरकार के निर्णय के अनुसार देहदान करने वाले व्यक्तियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है। इसी परंपरा का पालन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर डॉ. श्रीवास्तव की पार्थिव देह को पुलिस दल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। यह सम्मान ग्वालियर के गांधीनगर क्षेत्र में पूरे राजकीय गरिमा के साथ दिया गया, जिसमें पुलिस के जवानों ने अंतिम सलामी अर्पित की।
इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देशन में कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया, जिससे दिवंगत चिकित्सक को पूरा सम्मान मिल सके। गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान परिवारजन, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. श्रीवास्तव के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
गार्ड ऑफ ऑनर के उपरांत डॉ. श्रीवास्तव के परिजन उनकी पार्थिव देह को गजराराजा मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां देहदान की सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस मानवीय निर्णय के लिए परिवार के प्रति आभार जताया और कहा कि यह देहदान भविष्य के डॉक्टरों की शिक्षा और शोध में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
डॉ. अरुण श्रीवास्तव का यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि जीवन के बाद भी सेवा की भावना जीवित रह सकती है। उनका यह योगदान आने वाली पीढ़ियों को देहदान के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


