Parliament: विपक्षी दलों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के लोकसभा से दो बिल पारित, ध्वनि मत से मिली मंजूरी

नई दिल्ली :  पेगासस जासूसी विवाद और कृषि कानूनों के विरोध के कारण जारी गतिरोध के चलते मानसून सत्र में कामकाज को लेकर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। लिहाजा सरकार ने जरूरी विधयेकों को पारित कराने का सिलसिला शुरू कर दिया है।

इस क्रम में सोमवार को लोकसभा से हंगामे और विपक्ष के भारी विरोध के बीच फैक्ट्री रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फूड टेक्नोलाजी इंटरप्रिंयोरशिप मैनेजमेंट बिल पारित करा लिए गए।

विपक्ष ने हंगामे के बीच विधेयक पारित कराने पर सवाल उठाते हुए इसे अलोकतांत्रिक करार दिया और कहा कि सरकार बिना बहस जबरन विधेयक पारित करा रही है।

लोकसभा में फैक्ट्री रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल को पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कानून में नए बदलाव से एमएसएमई सेक्टर को मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह संशोधन यूके सिन्हा कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप किए गए हैं और सरकार ने संसद की स्थायी समिति के पिछले साल दिए सुझावों को भी विधेयक में शामिल कर लिया है। वित्त मंत्री ने सदन में तीन बजे जब विधेयक पेश किया तो विपक्ष का शोर-शराबा तेज हो गया और बिना चर्चा कराए ही चंद मिनटों के भीतर पीठासीन अधिकारी रमादेवी ने विधेयक को पारित करा दिया।

इसी हंगामे के बीच नए खाद्य मंत्री पशुपति कुमार पारस ने नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फूड टेक्नोलोजी इंटरप्रिंयोरशिप मैनेजमेंट बिल पेश किया। इसे भी आनन-फानन में विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक को राज्यसभा बजट सत्र के दौरान मार्च में पहले ही पारित कर चुकी है।

प्रेट्र के मुताबिक, इस विधेयक के जरिये हरियाणा में कुंडली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फूड टेक्नोलाजी इंटरप्रिंयोरशिप एंड मैनेजमेंट (एनआइएफटीईएम) और तमिलनाडु में तंजाबुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलाजी (आइआइएफपीटी) को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया जाएगा।

संसद में गतिरोध के बीच विधेयक पारित कराने के सरकार के रुख का कई विपक्षी दलों ने विरोध किया। लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार ने गलत तरीके से जबरन इन दोनों विधेयकों को बिना चर्चा के पारित किया है।

उनका कहना था कि जब सदन में व्यवस्था की स्थिति नहीं है तब विधेयकों को इस तरह बिना बहस के पारित कराना, चुने हुए जनप्रतिनिधियों को लोगों की आवाज सदन में रखने से रोकने जैसा है। अधीर ने कहा कि यह सांसदों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित करने का प्रयास है और कांग्रेस इस तरह के प्रयास का विरोध करेगी। 

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