‘शांति हमारी कमजोरी नहीं, रणनीतिक स्वायत्तता पर खतरा बर्दाश्त नहीं’ : रक्षा सम्मेलन में बोले राजनाथ सिंह; रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

​नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत की संप्रभुता, रणनीतिक सुरक्षा और वैश्विक रक्षा दृष्टिकोण पर देश का पक्ष स्पष्ट किया। रक्षा मंत्री ने दो-टूक कहा कि भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है और वह किसी भी देश की जमीन पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन इसे देश की कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। जब भी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर कोई आंच आएगी, देश हर स्तर पर मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तत्पर रहेगा।

​आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने साफ किया कि आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति का हिस्सा बनाने वाले और आतंकियों को शरण देने वाले किसी भी देश के साथ संवाद की कोई गुंजाइश नहीं है। आतंकवाद किसी भी राष्ट्र के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।

​रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल: 2029 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य : भारत के आयातक देश से एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक बनने की यात्रा का ब्योरा देते हुए रक्षा मंत्री ने आंकड़े साझा किए:

  • ​रिकॉर्ड निर्यात: वित्तीय वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा निर्यात महज ₹686 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। वर्तमान में भारत 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है।
  • ​भविष्य का रोडमैप: पिछले साल ₹30,000 करोड़ का बेंचमार्क पार करने के बाद अब सरकार ने वर्ष 2029 तक ₹50,000 करोड़ के वार्षिक रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • ​वैश्विक विश्वास: भारतीय मिसाइलों, रडार सिस्टम, उन्नत तोपों और गोला-बारूद की बढ़ती वैश्विक मांग ने साबित किया है कि ‘मेड इन इंडिया’ अब गुणवत्ता और भरोसे का मानक बन चुका है।

​रक्षा बजट ₹7.85 लाख करोड़: 75% पूंजीगत खरीद घरेलू उद्योग से : देश के सैन्य बजट और स्वदेशी खरीद के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव आया है:

  • ​बजट में तीन गुना से अधिक वृद्धि: वर्ष 2013-14 के ₹2.53 लाख करोड़ की तुलना में वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया गया है।
  • ​घरेलू विनिर्माताओं को प्राथमिकता: पूंजी अधिग्रहण बजट का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा (करीब ₹1.39 लाख करोड़) केवल घरेलू उद्योगों और एमएसएमई (MSME) से रक्षा खरीद के लिए आरक्षित रखा गया है।
  • ​स्वदेशीकरण की रफ्तार: सशस्त्र बलों की 5 पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट में 509 हथियार प्रणालियां शामिल हैं, जबकि डीपीएसयू की 6 सूचियों में शामिल 5,417 सब-सिस्टम और कंपोनेंट्स में से लगभग 3,300 उपकरणों का स्वदेशीकरण पूरा हो चुका है।

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