नई दिल्ली। देश के सुदूर ग्रामीण अंचलों में निवासरत परिवारों तक सेवानिवृत्ति सुरक्षा और वित्तीय साक्षरता की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई है। ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत प्रशिक्षित महिला सामुदायिक कैडर को अब ‘पेंशन सखी’ के रूप में तैयार किया जाएगा, जो गांव-गांव जाकर परिवारों को पेंशन योजनाओं से जोड़ेंगी।
संयुक्त सचिव और कार्यकारी निदेशक ने किए हस्ताक्षर : ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल की मौजूदगी में विभाग के संयुक्त सचिव अमित शुक्ल और पीएफआरडीए की कार्यकारी निदेशक सुमीत कौर कपूर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सचिव रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़े ग्रामीण परिवारों की आजीविका और आय के चक्र अनिश्चित होते हैं, इसलिए सामाजिक सुरक्षा केवल जोखिम से बचाव नहीं, बल्कि परिवारों को स्थायी समृद्धि और आर्थिक आत्मविश्वास देने का सबसे मजबूत माध्यम है।
पेंशन सखियों की प्रमुख जिम्मेदारियां व कार्यप्रणाली:-
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डोर-टू-डोर वित्तीय परामर्श: स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं और ‘लखपति दीदियों’ तक पहुंचकर उन्हें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और सेवानिवृत्ति नियोजन के लाभ समझाना।
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नामांकन एवं सहायता: ग्रामीणों को पेंशन योजनाओं में पंजीकृत कराना तथा नामांकन के बाद आने वाली किसी भी प्रक्रियागत समस्या का मौके पर समाधान करना।
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पारदर्शिता और विश्वास: अनौपचारिक व कृषि क्षेत्र के कामगारों को उनकी आय के अनुरूप नियमित छोटी बचत को पेंशन फंड में बदलने के लिए प्रेरित करना।
डिजिटल डैशबोर्ड और ‘लोकोस’ (LOCOS) प्रणाली से होगी निगरानी :-
पेंशन कवरेज के विस्तार को पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा:
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रियल-टाइम ट्रैकिंग: ग्रामीण विकास विभाग की अपनी ‘लोकोस’ प्रणाली और मोबाइल आधारित डिजिटल समाधानों के जरिए हर गांव में नामांकन की प्रगति दर्ज होगी।
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कवरेज गैप की पहचान: डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से उन क्षेत्रों और परिवारों की तत्काल पहचान की जा सकेगी, जो अब तक औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र से वंचित हैं।
औपचारिक बैंकिंग से आगे बढ़कर दीर्घकालिक सुरक्षा की ओर कदम : इस साझेदारी से पीएफआरडीए की नियामक विशेषज्ञता और एनआरएलएम के विशाल महिला जमीनी नेटवर्क का अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण भारत में बैंक खाते तो तेजी से खुले हैं, लेकिन जीवन प्रत्याशा बढ़ने के दौर में वृद्धावस्था सुरक्षा के लिए योजना बनाना अभी भी चुनौती बना हुआ था। ‘पेंशन सखी’ मॉडल इस खाई को पाटकर ग्रामीण परिवारों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाएगा।

