नई दिल्ली | 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, युवाओं, महिला प्रतिनिधित्व और विकास के मुद्दों पर सरकार का रोडमैप सामने रखा। करीब 76 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए समाज को भटकाने वाली प्रवृत्तियों से सतर्क रहना होगा और युवा शक्ति को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना होगा।
‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर पीएम ने जताई चिंता : प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सली अब काफी हद तक पीछे हट चुके हैं, लेकिन ऐसी विचारधाराएं अभी भी मौजूद हैं जो समाज में हिंसा, अराजकता और भ्रम पैदा करने का प्रयास कर सकती हैं।
उन्होंने ऐसी मानसिकता को पहचानने और उससे समाज को अलग रखने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री के मुताबिक युवाओं की ऊर्जा को नकारात्मक गतिविधियों के बजाय राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा जाना जरूरी है।
एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण : प्रधानमंत्री ने युवाओं को लेकर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार अगले एक वर्ष के दौरान 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग देने की दिशा में काम करेगी।
इसके अलावा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। सरकार का फोकस युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने पर रहेगा।
महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील : प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, ताकि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और मजबूत हो सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण का विषय लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि महिलाओं को उनका अधिकार देने की दिशा में मिलकर आगे बढ़ें।
लाल किले पर पहली बार हुआ ‘वंदे मातरम्’ का गायन : स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत भी खास रही। लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराया। इसके बाद पहली बार लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। राष्ट्रगान के साथ समारोह आगे बढ़ा और प्रधानमंत्री ने देश को अपना संबोधन दिया।
विकास के आंकड़ों के जरिए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं : प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बीते वर्षों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन करीब चार गुना, खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादन करीब पांच गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग लगभग सात गुना बढ़ी है।
इसी अवधि में आधुनिक रेलवे कोचों के उत्पादन में करीब 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना वृद्धि का दावा किया गया। प्रधानमंत्री ने डिजिटल क्षेत्र में भी भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख करते हुए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं, पेटेंट और डिजिटल लेनदेन में हुई वृद्धि को रेखांकित किया।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी किया जिक्र : प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास का असर आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। उनके अनुसार नल से जल कनेक्शन, गैस कनेक्शन, गरीब परिवारों के लिए शौचालय और वंचित वर्गों के लिए आवास निर्माण की गति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है।
उन्होंने शासन व्यवस्था में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया और कहा कि हजारों अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को समाप्त किया गया तथा सैकड़ों पुराने कानूनों को हटाया गया है।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर : प्रधानमंत्री ने देश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में किए गए कार्यों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में जिस गति और व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है, वह देश के विकास की बदलती तस्वीर को दर्शाता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवा शक्ति, महिलाओं की भागीदारी, तकनीक, नवाचार और मजबूत अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण आधार बताया।

