केंद्रीय बजट 2025-26 के तहत PPP परियोजना पाइपलाइन तैयार : तीन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 852 परियोजनाएं

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा के क्रियान्वयन की दिशा में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों विभाग ने तीन वर्षीय पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) परियोजना पाइपलाइन तैयार की है।

इस व्यापक पाइपलाइन में केंद्र सरकार के विभिन्न अवसंरचना मंत्रालयों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 852 परियोजनाएं शामिल की गई हैं, जिनकी अनुमानित कुल परियोजना लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

इस PPP परियोजना पाइपलाइन का उद्देश्य देश में अवसंरचना विकास को गति देना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को व्यवस्थित एवं पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ाना है।

इसके माध्यम से संभावित PPP परियोजनाओं की अग्रिम जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे निवेशकों, डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और अन्य हितधारकों को समय पर योजना बनाने और निवेश से जुड़े बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी

आर्थिक मामलों विभाग द्वारा संकलित यह पाइपलाइन सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, ऊर्जा, शहरी अवसंरचना, जल आपूर्ति, स्वच्छता और डिजिटल अवसंरचना जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करती है।

केंद्र और राज्य स्तर पर परियोजनाओं की पहचान और सूचीबद्धता से यह संकेत मिलता है कि सरकार दीर्घकालिक अवसंरचना योजना को संस्थागत रूप देने पर जोर दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, PPP पाइपलाइन से परियोजनाओं की तैयारी की गुणवत्ता में सुधार होगा और कार्यान्वयन से पहले जोखिमों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। इससे निजी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें आगामी वर्षों में उपलब्ध परियोजनाओं का स्पष्ट रोडमैप मिलेगा।

साथ ही, प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी, जिससे लागत और समय-सीमा दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार सार्वजनिक निवेश के साथ-साथ निजी पूंजी को भी अवसंरचना क्षेत्र में आकर्षित करने पर जोर दे रही है।

PPP मॉडल को रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और क्षेत्रीय संतुलन के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना पाइपलाइन के जरिए केंद्र और राज्य सरकारें निवेशकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगी।

कुल मिलाकर, तीन वर्षीय PPP परियोजना पाइपलाइन को देश के अवसंरचना विकास के लिए एक रणनीतिक दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल निवेश के अवसरों की स्पष्टता बढ़ेगी, बल्कि भारत में सार्वजनिक-निजी साझेदारी मॉडल को और अधिक सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी।

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