Datia News : नई दिल्ली। घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतें थामने के लिए आयातित तेलों की टैरिफ वैल्यू में कटौती की गई है। इससे खाद्य तेल बाजार में कीमतों के घटने की उम्मीद है। घरेलू जरूरतों के लिए सर्वाधिक आयात होने वाले पाम आयल की टैरिफ वैल्यू में 112 डालर और सोयाबीन तेल की टैरिफ वैल्यू में 37 डालर प्रति टन की कटौती गई है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने अंतरराष्ट्रीय कीमतें घटने के बाद आयात टैरिफ वैल्यू में संशोधन किया है।
इस संबंध में जारी अधिसूचना गुरुवार से लागू हो गई। बाजार के जानकारों और टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की इस पहल से खाद्य तेलों की महंगाई को थामने में मदद मिल सकती है। तिलहन के घरेलू उत्पादन और खाद्य तेलों की मांग में लगातार अंतर बढ़ता जा रहा है। इसे पूरा करने के लिए आयातित खाद्य तेल ही एकमात्र उपाय है। चालू खाद्य तेल वर्ष 2021-22 (नवंबर से अक्टूबर) में घरेलू मांग में इजाफा होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार तेजी से कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
पिछले साल के मुकाबले चालू तेल वर्ष में नवंबर, 2020 से मई, 2021 के दौरान नौ फीसद अधिक यानी 70.62 लाख टन के मुकाबले 76.78 लाख खाद्य तेलों का आयात हो चुका है। कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि टैरिफ वैल्यू में कटौती से खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में कमी आएगी।
भारत अपनी जरूरतों का दो तिहाई आयात से पूरा करता है। सीबीआइसी की जारी सूची के मुताबिक क्रूड पाम आयल की टैरिफ वैल्यू 1136 डालर, आरबीडी पाम आयल की 1148 डालर, अन्य पाम आयल की 1142 डालर, क्रूड पामोलिन की 1150 डालर, आरबीडी पामोलिन की 1153 डालर, अन्य पामोलिन की 1152 डालर और क्रूड सोयाबीन आयल की 1415 डालर प्रति टन होगी।


