रेलवे को मिला बड़ा बूस्ट: 24,815 करोड़ की दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी, 601 किमी नेटवर्क होगा विस्तार

नई दिल्ली : देश में रेल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने दो महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) की बैठक में करीब ₹24,815 करोड़ की लागत वाली इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई।

इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में लगभग 601 किलोमीटर की वृद्धि होगी, जिससे न केवल यातायात सुगम होगा बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नया बल मिलेगा।


परियोजनाओं से बढ़ेगी रफ्तार और क्षमता : स्वीकृत परियोजनाओं में गाजियाबाद–सीतापुर और राजमुंदरी (निदादावोलु)–विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) रेल खंडों पर तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण शामिल है।

● गाजियाबाद–सीतापुर खंड (403 किमी) उत्तर भारत के व्यस्त नेटवर्क का हिस्सा है, जहां मौजूदा क्षमता पहले ही 160% से अधिक उपयोग में है।

● वहीं, आंध्र प्रदेश का राजमुंदरी–विशाखापत्तनम खंड (198 किमी) पूर्वी तट के प्रमुख माल परिवहन मार्गों में शामिल है।

इन परियोजनाओं से रेल परिचालन अधिक सुगम होगा, ट्रेनों की देरी कम होगी और माल ढुलाई की क्षमता में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।


लॉजिस्टिक और उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा : नई मल्टीट्रैकिंग लाइनों के निर्माण से कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, स्टील और कंटेनर जैसे प्रमुख सामानों के परिवहन में तेजी आएगी। अनुमान है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से हर साल लाखों टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।

इसके साथ ही सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी, जिससे लॉजिस्टिक लागत में हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी और उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।


पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा : इन रेल परियोजनाओं से कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। उत्तर प्रदेश के नैमिषारण्य, गढ़मुक्तेश्वर और अमरोहा जैसे स्थानों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के अन्नवरम और द्रक्षरामम जैसे तीर्थ क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।

बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे।


रोजगार और पर्यावरण पर सकारात्मक असर : परियोजनाओं के निर्माण से करोड़ों मानव-दिवस के रोजगार सृजित होंगे। इसके अलावा, रेलवे के उपयोग बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रेलवे, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन माध्यम होने के कारण देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।


गति शक्ति योजना के तहत विकास को गति : ये दोनों परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और देश की लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना है।

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्रीय संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

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